विचाराधीन लिस्ट से बाहर रखे गए करीब 27 लाख लोगों के वोटिंग राइट्स का किसी भी तरह से उल्लंघन नहीं किया जा रहा है। वे ट्रिब्यूनल में अपील कर सकते हैं। यह बात सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की बेंच ने सोमवार को SIR केस में कही। लिस्ट से बाहर रखे गए लोगों की पिटीशन के जवाब में बेंच ने कहा कि नियमों के मुताबिक वोटर लिस्ट फ्रीज कर दी गई है। अब लिस्ट में बदलाव मुमकिन नहीं है। हालांकि, ट्रिब्यूनल नियमों के मुताबिक बाहर रखे गए लोगों के एप्लीकेशन को वेरिफाई करेगा। इसलिए, भले ही वे इस चुनाव में अपने वोटिंग राइट्स का इस्तेमाल न कर पाएं, लेकिन उनके वोटिंग राइट्स को किसी भी तरह से कैंसिल नहीं किया जा रहा है। इस दिन रिपोर्टर्स से बात करते हुए तृणमूल के शशि पांजा जी और कुणाल घोष जी ने कहा कि राज्य ने पहले ही कह दिया है कि एक भी वैलिड वोटर का नाम बाहर नहीं रखा जा सकता। ममता बनर्जी जी ने वैलिड वोटर्स के लिए लड़ाई लड़ी है। उनकी लड़ाई की वजह से ही विचाराधीन लिस्ट से 32 लाख से ज़्यादा लोगों के नाम वोटर लिस्ट में जगह बना पाए हैं।
