पाकिस्तान में होने वाली शांति वार्ता पर फुलस्टॉप लग गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने विटकॉफ और कुशनर का पाकिस्तान दौरा रद्द कर दिया है. उन्होंने कहा है कि 18 घंटे की यात्रा का कोई मतलब नहीं है। ईरान जब चाहे हमसे फोन पर बात करे. फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी वार्ताकार स्टीव विटकॉफ और कुशनर अब ईरान के साथ वार्ता के लिए पाकिस्तान नहीं जाएंगे. ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के लिए पाकिस्तान की 18 घंटे की उड़ान भरने का कोई मतलब नहीं है. ईरान के साथ जंग में अमेरिका के पास सभी निर्णायक शक्तियां मौजूद हैं.ईरानी जब चाहें अमेरिका को फोन कर सकते हैं. इस्लामाबाद जाने के लिए तैयार हो रहे प्रतिनिधिमंडल से मैंने कहा- आप वहां जाने के लिए 18 घंटे की उड़ान नहीं भर सकते. ट्रंप ने कहा, “हमारे पास सभी विकल्प हैं। ईरान जब चाहे हमें फोन कर सकता है. आप अब 18 घंटे की उड़ान भरने के बाद वहां जाकर बेकार की बातें नहीं करेंगे. यात्रा में बहुत ज़्यादा समय बर्बाद होता था और काम भी बहुत ज़्यादा था. इसके अलावा उनके (ईरान) नेतृत्व के भीतर ही ज़बरदस्त आपसी कलह और भ्रम की स्थिति है. किसी को नहीं पता कि असल में बागडोर किसके हाथ में है. सारे पत्ते हमारे हाथ में हैं, उनके पास कुछ भी नहीं! बता दें कि इससे पहले ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के साथ बातचीत करने के बाद ओमान रवाना हो चुके हैं. पाकिस्तान से रवाना होने से पहले अरागची ने बातचीत करने के लिए अमेरिका के सामने 10 शर्तें रखी हैं. ईरान ने पहले ही साफ कर दिया था कि वो अमेरिका से कोई बातचीत नहीं करेगा. इस बीच बड़ा सवाल है- अगर ईरानी प्रतिनिधिमंडल को अमेरिका से बातचीत नहीं करनी थी तो अरागची इस्लामाबाद क्यों पहुंचे. इसको लेकर ईरान और अमेरिका की तरफ से अलग-अलग बयान सामने आए. पाकिस्तान आने से पहले अरागची ने कहा था कि वो इस्लामाबाद, मस्कट और मॉस्को की यात्रा शुरू कर रहे हैं. इसका मकसद द्विपक्षीय मामलों पर तालमेल बनाना है. यानी ये संदेश देने की कोशिश हुई कि अरागची की यात्रा का एजेंडा अमेरिका से बातचीत नहीं है. ईरान ने साफ किया कि धमकी और दबाव के बीच अमेरिका से सीधी वार्ता संभव नहीं है.

By UJAGAR

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