तृणमूल कांग्रेस के ‘बागी’ सांसदों के लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से उनके आवास पर मिलने जाने की खबर सामने आई। इस दौरान एक अलग संसदीय गुट बनाने की मांग वाला हस्ताक्षरित पत्र सौंपने की खबर सामने आई। इसी बीच तृणमूल के अखिल भारतीय महासचिव अभिषेक बनर्जी का स्पीकर बिरला को लिखे एक पत्र सामने आया है। इसमें डायमंड हार्बर के सांसद ने आग्रह किया है कि पार्टी के किसी भी गुट को मान्यता न दी जाए। दरअसल पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी की पार्टी को अपने ही विधायकों और सांसदों की भारी बगावत का सामना करना पड़ रहा है। बागी गुट का दावा है कि उनके साथ 22 सांसद हैं। ऐसे में पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने अपने पत्र में अनुरोध किया है कि उनके इस निवेदन को रिकॉर्ड पर लिया जाए कि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) को एक ही राजनीतिक पार्टी माना जाए जिसका प्रतिनिधित्व सदन में केवल उसके अधिकृत नेता और मुख्य सचेतक की ओर से किया जाए। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि बागी सांसदों की ओर से किसी भी तरह के पत्राचार या अनुरोध पर कोई फैसला करने से पहले पार्टी को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाए। तृणमूल कांग्रेस सांसद सागरिका घोष और कीर्ति आजाद ने 10 जून को लिखे बनर्जी के इस पत्र को रविवार को यहां बिरला के आवास पर उन्हें सौंपा। बनर्जी ने अपने पत्र में कहा कि एआईटीसी को एक ही राजनीतिक पार्टी माना जाए जिसका प्रतिनिधित्व सदन में केवल उसके अधिकृत नेता और मुख्य सचेतक के माध्यम से हो और एआईटीसी के किसी भी कथित अलग गुट या धड़े को कोई मान्यता, दर्जा या सुविधा नहीं दिया जाए। उन्होंने कहा कि अगर उपर्युक्त प्रकार का कोई भी पत्राचार या संचार प्राप्त होता है, तो उस पर कोई निर्णय लेने से पहले एआईटीसी को अपना पक्ष रखने और सुने जाने का अवसर प्रदान किया जाए। बनर्जी ने यह भी कहा कि विलय के किसी भी दावे के लिए राजनीतिक पार्टी का विलय और दो-तिहाई विधायकों का समर्थन, दोनों जरूरी हैं और कानून के तहत इनमें से सिर्फ एक शर्त पूरी करना काफी नहीं होगा। बागी गुट का कहना है कि उसे पार्टी के अधिकतर सांसदों और विधायकों का समर्थन प्राप्त है। बनर्जी ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के पास 10वीं अनुसूची के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले किसी भी आचरण के खिलाफ दल-बदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई शुरू करने का अधिकार सुरक्षित है। इस बीच, नयी दिल्ली रवाना होने से पहले बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कोलकाता हवाई अड्डे पर पत्रकारों से कहा कि जल्द दो और लोकसभा सदस्य इस गुट में शामिल हो सकते हैं जिससे सदन में उनकी संख्या 22 हो जाएगी। तृणमूल कांग्रेस पर नियंत्रण की लड़ाई संसद और पश्चिम बंगाल विधानसभा दोनों जगहों पर साथ-साथ चल रही है। पिछले हफ्ते पार्टी के 80 में से 64 विधायक अलग हो गए और विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस से एक अलग विधायक दल समूह के तौर पर मान्यता हासिल कर ली; साथ ही ऋताब्रता बनर्जी को विपक्ष का नेता माना गया। ममता बनर्जी के गुट ने इस फैसले को कलकत्ता उच्च न्यायालय में चुनौती दी है।

By UJAGAR

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