अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर बनी सहमति पश्चिमी एशिया और दुनिया के अन्य मुल्कों के लिए भले राहतभरी खबर हो, लेकिन इजरायल इस डील से नाखुश नजर आ रहा है. इजरायल के नेशनल सिक्योरिटी मिनिस्टर बेन ग्वीर ने साफ कहा कि वह न तो यूएस प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के अधीन है और न ही इस डील को मानने के लिए मजबूर है. दुनिया भर में हो रहे संघर्षों, युद्धों और राजनीतिक तनावों की जानकारी देने वाली क्लैश रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल के नेशनल सिक्योरिटी मिनिस्टर बेन ग्वीर ने यूएस-ईरान के बीच शांति समझौते को लेकर कहा, डोनाल्ड ट्रम्प का समझौता हमें बाध्य नहीं करता है. इजरायल संयुक्त राज्य अमेरिका के अधीन नहीं है. हम एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र हैं!’ उन्होंने आगे कहा, ‘हम अमेरिका से प्यार करते हैं और राष्ट्रपति ट्रम्प के आभारी हैं फिर भी इजरायल कोई रूढ़िवादी देश नहीं है.’ इजरायल में अमेरिका-ईरान समझौते को लेकर नाराजगी देखी जा रही है. राजनीतिक दलों और सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि प्रस्तावित समझौता ईरान के परमाणु कार्यक्रम, बैलिस्टिक मिसाइलों और उसके समर्थित संगठनों (हिज़्बुल्लाह, हमास, हूती) से जुड़े सुरक्षा खतरों का बेहतर तरीके से समाधान नहीं करता. विपक्षी नेताओं ने इसे इज़रायल की विदेश और सुरक्षा नीति की बड़ी विफलता बताया है. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी इस पर ज्यादा कुछ बोलते हुए नजर नहीं आ रहे हैं. उन्होंने केवल इतना कहा है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे. आलोचकों का मानना है कि यह समझौता ईरान को आर्थिक राहत देगा, लेकिन उसकी क्षेत्रीय गतिविधियों और सैन्य क्षमताओं पर ठोस अंकुश नहीं लगाएगा. डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार शाम (14 जून) को ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट कर ऐलान किया कि अमेरिका और ईरान के बीच 107 दिन तक जारी रहे युद्ध को खत्म करने और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने पर सहमति बन गई है और दोनों देशों के बीच समझौते पर शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर किए जाएंगे.
