लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जम्मू-कश्मीर में जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। बाढ़, भूस्खलन और बादल फटने जैसी घटनाओं ने पिछले दो दिनों में बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। अलग-अलग जिलों से सामने आई घटनाओं में 24 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 6 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। प्रशासन और राहत एजेंसियां लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं, लेकिन खराब मौसम और लगातार हो रही बारिश राहत कार्य में बड़ी चुनौती बनी हुई है। सबसे गंभीर स्थिति पुंछ और राजौरी जिलों में है, जहां कई गांवों का संपर्क टूट गया है। वहीं मौसम विभाग (IMD) ने अगले 48 घंटों तक भारी से अति भारी बारिश, भूस्खलन और अचानक बाढ़ (Flash Flood) का अलर्ट जारी किया है। एहतियात के तौर पर श्री अमरनाथ यात्रा, माता वैष्णो देवी यात्रा, शिवखोड़ी और सरथल यात्रा को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। जम्मू-कश्मीर में लगातार हो रही बारिश के कारण पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और मलबा गिरने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। कई स्थानों पर सड़कें धंस गई हैं, पुलों को नुकसान पहुंचा है और नदी-नाले उफान पर हैं। इससे कई गांवों का संपर्क जिला मुख्यालयों से टूट गया है। प्रशासन के मुताबिक सबसे ज्यादा प्रभावित जिले पुंछ, राजौरी, डोडा, रियासी और किश्तवाड़ हैं। सबसे बड़ा हादसा पुंछ जिले के सुरनकोट क्षेत्र के लोरन गांव में हुआ। लगातार बारिश के कारण पहाड़ी से भारी मलबा एक कच्चे मकान पर आ गिरा, जिससे एक ही परिवार के सात लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। स्थानीय लोगों और बचाव दल ने घंटों तक मलबा हटाकर शव निकाले। डोडा जिले में जम्मू जा रही एक यात्री बस पर अचानक पहाड़ से बड़ी चट्टान गिर गई। इस हादसे में 2 यात्रियों की मौत और 4 लोग घायल हुआ है। घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। काश्तीगढ़ इलाके में लगातार बारिश के कारण एक मकान ढह गया, जिसमें दबकर एक महिला की मौत हो गई। कई अन्य घरों को भी नुकसान पहुंचा है। खराब मौसम और लगातार भूस्खलन के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाते हुए कई प्रमुख धार्मिक यात्राएं रोक दी हैं। फिलहाल श्री अमरनाथ यात्रा, माता वैष्णो देवी यात्रा, रियासी की शिवखोड़ी यात्रा, किश्तवाड़ की सरथल यात्रा पर रोक लगाई गई है. हालांकि मौसम में आंशिक सुधार के दौरान बालटाल मार्ग से सीमित संख्या में श्रद्धालुओं को आगे बढ़ने की अनुमति दी गई। यात्रा स्थगित होने के कारण कटड़ा में करीब 15 हजार श्रद्धालु फंसे हुए हैं। सभी यात्रा दोबारा शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। श्राइन बोर्ड ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे आधिकारिक सूचना मिलने तक यात्रा शुरू न करें। लगातार बारिश से कई बरसाती नाले खतरे के निशान के आसपास या उससे ऊपर बह रहे हैं। कई ग्रामीण इलाकों में सड़कें टूट गई हैं और जलभराव के कारण आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है। वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर कई स्थानों पर- पत्थर गिरने, मलबा आने, रास्ता बाधित होने की घटनाएं सामने आई हैं। राहत की बात यह रही कि यात्रा पहले ही रोक दी गई थी, जिससे कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। भारतीय मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों के लिए चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि- भारी से अति भारी बारिश, भूस्खलन, फ्लैश फ्लड, नदी-नालों के जलस्तर में तेज बढ़ोतरी की आशंका बनी हुई है। लोगों से पहाड़ी क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा न करने और प्रशासन की एडवाइजरी का पालन करने की अपील की गई है। हालात को देखते हुए कई जिलों में प्रशासन ने सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं ताकि राहत और बचाव कार्य में किसी प्रकार की कमी न रहे। NDRF, SDRF, पुलिस और स्थानीय प्रशासन संयुक्त रूप से प्रभावित इलाकों में राहत अभियान चला रहे हैं। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पुंछ और राजौरी में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को 6-6 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। इसके अलावा प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और राहत कार्यों में तेजी लाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
