कोलकाता में मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) द्वारा वार्षिक ’21 जुलाई शहीद दिवस’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। 1993 में पुलिस गोलीबारी में मारे गए 13 युवा कार्यकर्ताओं की याद में आयोजित इस रैली में तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी, टीएमसी नेता कुणाल घोष और सौगत राय सहित प्रमुख नेता व लाखों समर्थक उपस्थित रहे। इस अवसर पर पार्टी नेतृत्व ने जहाँ अपनी भावी राजनीतिक रूपरेखा और प्राथमिकताओं को रेखांकित किया, वहीं राज्य व देश के मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रमों पर भी विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम से ठीक पहली रात (सोमवार देर रात) सुरक्षा और विरोध प्रदर्शनों को लेकर काफी गहमागहमी देखने को मिली। टीएमसी नेता कुणाल घोषको सूचना मिली थी कि विरोध प्रदर्शन और अव्यवस्था के चलते उन्हें रोका जा सकता है, जिसके बाद वे देर रात खुद घर से बाहर निकल आए ताकि स्थिति का सामना कर सकें और आयोजन स्थल की तैयारियों से जुड़ सकें। वहीं, तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी ने बताया कि उनके आवास के बाहर भी रैली निकालकर उन्हें कार्यक्रम में जाने से रोकने का प्रयास किया गया था। ममता बनर्जी ने कार्यकर्ताओं की सराहना करते हुए कहा कि तमाम विरोधों, रुकावटों और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद टीएमसी कार्यकर्ताओं ने पूरे संयम, अनुशासन और निडरता के साथ कार्यक्रम की व्यवस्था को सुचारू बनाए रखा। हाल के दिनों में पार्टी छोड़कर गए नेताओं का जिक्र करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि असंतुष्टों के जाने से संगठन के जनाधार पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी में समर्पित और निष्ठावान कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाया जाएगा और पार्टी से अलग हुए नेताओं के रिकॉर्ड को जनता के सामने लाया जाएगा। पार्टी की शुरुआत (1997-1998): ममता बनर्जी ने याद दिलाया कि जब 1997 के आखिर में उन्होंने कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस की नींव रखी थी, तो बेहद कम समय (महज 1 महीने और 22 दिनों की तैयारियों) में उनकी नई पार्टी ने 1998 के अपने पहले ही लोकसभा चुनाव में 7 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया था।
- सिंगूर आंदोलन (2006): जब किसानों और जनता के अधिकारों के लिए उन्होंने 26 दिनों की ऐतिहासिक भूख हड़ताल की थी।
तृणमूल सुप्रीमो ने कहा कि राजनीतिक दौर बदलते रहते हैं, लेकिन पार्टी का मूल आधार जन-आंदोलन और आम जनता से जुड़ाव ही रहेगा। इसके साथ ही उन्होंने अतीत में बारुईपुर में अपने नजरबंद रहने की घटना और चुनाव बाद हुई हिंसा का भी जिक्र किया। मंच से बोलते हुए ममता बनर्जी, सांसद सौगत राय और अन्य नेताओं ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर नीतिगत व राजनीतिक सवाल उठाए:
- ईवीएम और चुनावी पारदर्शिता: टीएमसी नेतृत्व ने चुनाव प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाली ईवीएम की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए चुनाव प्रणाली में और अधिक पारदर्शिता की मांग की।
- दिल्ली के हालात व केंद्रीय मुद्दे: दिल्ली में चल रहे राजनीतिक घटनाक्रमों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रुख और राम मंदिर के संदर्भ में सामने आई वित्तीय अनियमितताओं की खबरों को लेकर केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण की मांग की गई।
कार्यक्रम के दौरान प्रख्यात रंगकर्मी और बुद्धिजीवी चंदन सेन ने ‘अकादमी ऑफ फाइन आर्ट्स’ परिसर से जुड़ी एक हालिया घटना की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ समूहों द्वारा सांस्कृतिक केंद्रों के राजनीतिकरण और गेरुआकरण का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने राज्य के सभी नागरिकों और कला जगत से अपील की कि वे ऐसे मामलों में एकजुट होकर लोकतांत्रिक और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा करें। 21 जुलाई की इस रैली और दिए गए बयानों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) तथा राज्य के अन्य विपक्षी दलों की ओर से प्रतिक्रिया सामने आई है। भाजपा प्रवक्ताओं और अन्य विरोधी नेताओं का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस अपनी प्रशासनिक विफलताओं, अंदरूनी गुटबाजी और हालिया राजनीतिक चुनौतियों से ध्यान भटकाने के लिए केंद्र सरकार और विपक्षी दलों पर निराधार आरोप लगा रही है। विपक्षी नेताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में आरोपों के बजाय विकास और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर ध्यान दिया जाना चाहि
