अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के 60 व्यापारिक साझेदारों पर नए टैरिफ लगाने की घोषणा की है। इसके तहत इन देशों से होने वाले आयात पर 10% से 12.5% तक टैक्स लगाया जाएगा। भारत से आने वाले आयात को 10% वाली टैरिफ की श्रेणी में रखा गया है। अमेरिका ने आरोप लगाया है कि इन उत्पादों को बनाने में जबरन मजदूरी का इस्तेमाल किया गया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से मिली करारी हार के बाद लगाए गए अस्थायी टैक्स की समय-सीमा शुक्रवार को समाप्त हो रही है। समाचार एजेंसी ANI ने अधिकारियों के हवाले से बताया कि शुरुआत में नई दिल्ली पर 12.5% टैरिफ लगाने की योजना थी, लेकिन लेबर प्रैक्टिस पर हुई अच्छी बातचीत के बाद भारत को कम दर वाली कैटेगरी में जगह मिली। US ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) ने बताया कि भारत उन 17 देशों में शामिल है, जिन पर कम यानी 10% टैरिफ लगेगा। इस स्लैब में शामिल देशों में ब्रिटेन, कनाडा, इंडोनेशिया, मेक्सिको और बांग्लादेश भी हैं। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने कहा, “अमेरिका ने जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात पर लगभग एक सदी से रोक है और इसे सख्ती से लागू किया जाता है। अब समय आ गया है कि हमारे व्यापारिक साझेदार भी ऐसा ही करें।” ये नए टैरिफ शुक्रवार रात 12 बजे से लागू होंगे। ग्रीर ने उन साझेदारों की तारीफ की जिन्होंने इस मामले में तेजी से कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा, मैं उन ट्रेड पार्टनर से उत्साहित हूं जिन्होंने जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात पर रोक लगाने के लिए तेजी से कदम उठाए हैं। मैं उनके प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए उत्सुक हूं। अमेरिका ने यह टैरिफ ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 के तहत लगाए हैं। यह धारा राष्ट्रपति को उन देशों पर आयात टैक्स और अन्य प्रतिबंध लगाने की इजाजत देती है, जो “अनुचित, बेवजह या भेदभावपूर्ण व्यापारिक तरीके” अपनाते हैं। ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में चीन पर भारी टैरिफ लगाने के लिए धारा 301 का इस्तेमाल किया था और वे अदालती चुनौतियों में भी टिके रहे थे। धारा 301 के तहत और टैरिफ लगाए जाने की संभावना है, क्योंकि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि के कार्यालय ने 16 देशों के खिलाफ जांच शुरू की है कि क्या उन्होंने जरूरत से ज्यादा सामान का उत्पादन किया है जिससे कीमतें गिरी हैं और वैश्विक बाजार में अमेरिकी कंपनियों को नुकसान हुआ है। इन 16 देशों से अमेरिका का 70 प्रतिशत आयात होता है। अभी तक इन देशों के खिलाफ जांच पूरी नहीं हुई है।
