शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभालते ही प्रह्लाद जोशी एक्शन मोड में आ गए हैं. रविवार को नए शिक्षा मंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक अहम समीक्षा बैठक की. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, प्रह्लाद जोशी ने रविवार शाम अपने आवास पर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के अधिकारियों की अलग से बैठक भी बुलाई. एनटीए वही संस्था है जो NEET, UGC NET और CUET जैसी बड़ी प्रतियोगी परीक्षाएं आयोजित करती है. फिलहाल प्रह्लाद जोशी के पास खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों का मंत्रालय भी है. अब शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी भी उन्हें सौंपी गई है. ऐसे में रविवार सुबह करीब 11:30 बजे वे कर्तव्य भवन पहुंचे और वहां पहुंचते ही बैठकों का दौर शुरू कर दिया. इस बैठक में राज्य मंत्री जयंत चौधरी भी मौजूद रहे. बताया जा रहा है कि हाल ही में नियुक्त स्कूल शिक्षा सचिव टी.के. अनिल कुमार ने प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय के कामकाज की विस्तार से जानकारी दी. इसके बाद उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी ने भी एक प्रेजेंटेशन दी. यहां समझने वाली बात यह है कि विनीत जोशी को हाल ही में NEET पेपर लीक विवाद के बाद उनके पद से हटा दिया गया था. बैठक के दौरान उन्होंने मंत्रालय की योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी भी दी. बैठक के दौरान प्रह्लाद जोशी ने अपनी तरफ से भी कुछ चिंताएं जाहिर कीं. खास तौर पर स्कूलों में यूनिफॉर्म जैसी बुनियादी सुविधाएं समय पर उपलब्ध नहीं होने पर उन्होंने नाराजगी जताई. वहीं, सोमवार से संसद का सत्र भी फिर शुरू होने जा रहा है. शिक्षा मंत्रालय से जुड़े कुल 41 सवाल सूचीबद्ध बताए जा रहे हैं. इन सभी सवालों के जवाब शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी और उनके दोनों राज्य मंत्री मिलकर देंगे. प्रह्लाद जोशी की बात करें तो उनका राजनीतिक सफर संघर्षों से भरा रहा. उन्हें शुरुआत में कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं मिली. उन्होंने कर्नाटक में स्थानीय स्तर से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की. 1990 के दशक की शुरुआत में हुबली के ईदगाह मैदान पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के आंदोलन में भाग लेने के कारण वह पहली बार सुर्खियों में आए. इसके बाद भी वह कई छोटे-बड़े आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों के जरिए अपनी राजनीतिक पहचान मजबूत करते रहे. साल 2004 प्रह्लाद जोशी के राजनीतिक करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ. इसी साल वह पहली बार धारवाड़ लोकसभा सीट से सांसद चुने गए. इसके बाद 2009, 2014, 2019 और 2024 में भी लगातार इसी सीट से जीत दर्ज करते रहे. बाद में केंद्र की राजनीति में वे सक्रिय हुए और कई जिम्मेदारियां उन्होंने संभालीं.

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