जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संसद मार्च और विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन चलाने के मामले में बड़े खुलासे हुए हैं। दिल्ली पुलिस ने इससे इनकार किया था कि उसने पैलेट गन का इस्तेमाल किया है। लेकिन द हिन्दू अखबार ने मंगलवार 28 जुलाई को आधिकारिक दस्तावेजों और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की आंतरिक जांच रिपोर्ट से तमाम तथ्यों का खुलासा किया है। द हिन्दू की रिपोर्ट के मुताबिक रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने दिल्ली पुलिस के डीसीपी रैंक के अधिकारी के निर्देश पर ही पैलेट गन का इस्तेमाल किया था। यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई के दौरान इस मुद्दे का खुलासा किया है। पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में 20 जुलाई की देर रात (1:24 AM) दर्ज की गई जनरल डायरी (GD) एंट्री के मुताबिक: भीड़ को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली पुलिस के एक डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (DCP) स्तर के अधिकारी के स्पष्ट आदेश पर RAF के डिप्टी कमांडेंट ने एंटी-रॉयट गन /पैलेट गन से फायरिंग की। हालांकि दिल्ली पुलिस 20 जुलाई से ही पैलेट गन के इस्तेमाल से मना कर रही है। नॉन-इलेक्ट्रिकल शेल: 55 राउंड, इलेक्ट्रिकल शेल: 15 राउंड, टियर स्मोक ग्रेनेड (आंसू गैस): 5, प्लास्टिक पेलेट वाले बैलिस्टिक कारतूस: 2 राउंड, यह पहला मौका है जब देश की राजधानी में निहत्थे या असैन्य प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन (पंप एक्शन गन) का इस्तेमाल किया गया। नेता विपक्ष राहुल गांधी ने इस मामले पर लगातार ट्वीट किया। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें पैलेट गन से पीड़ित युवक को पेश किया। उन्होंने पीड़ित के घर का दौरा भी किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री को एक पत्र लिखकर इस मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की है। छात्र संगठनों ने भी प्रदर्शनकारी छात्रों पर पैलेट गन के इस्तेमाल को अनुचित और अत्यधिक बल प्रयोग करार देते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय से जवाब मांगा है।

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