प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को देशवासियों के नाम एक प्रेरणादायक संदेश साझा करते हुए प्रकृति संरक्षण, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर साझा किए गए संदेश में उन्होंने संस्कृत सुभाषितों और उनके सरल हिंदी अर्थ के माध्यम से प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, सेवा और संतुलित जीवन का महत्व बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि पर्यावरण का संरक्षण केवल प्रकृति की रक्षा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की भी जिम्मेदारी है। अपने संदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा कि प्रकृति, पर्यावरण और संपूर्ण सृष्टि का सम्मान भारतीय संस्कृति की मूल भावना है। उन्होंने लोगों से अपील की कि सभी नागरिक प्रकृति के प्रति सेवा और आभार का भाव रखें तथा स्वस्थ, समृद्ध और विकसित भारत के निर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएं। उनके अनुसार पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि जनभागीदारी से ही सफल हो सकता है। प्रधानमंत्री ने संस्कृत श्लोकों के माध्यम से यह संदेश दिया कि भारतीय परंपरा हमेशा प्रकृति के साथ संतुलित और सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा देती रही है। उन्होंने कहा कि प्रकृति और धर्म के अनुरूप जीवन ही सुख, शांति और समृद्धि का आधार है। उन्होंने अपने संदेश में यह भी रेखांकित किया कि हमारी सांस्कृतिक विरासत हमें पर्यावरण संरक्षण को जीवन का हिस्सा बनाने की सीख देती है। इससे एक दिन पहले गुरु पूर्णिमा के अवसर पर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को शुभकामनाएं दी थीं। उन्होंने भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा को नमन करते हुए कहा था कि गुरु केवल शिक्षा ही नहीं देते, बल्कि संस्कार, प्रेरणा और सकारात्मक ऊर्जा के माध्यम से समाज और राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पिछले कुछ दिनों से प्रधानमंत्री मोदी लगातार भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराओं और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विचार सोशल मीडिया के माध्यम से साझा कर रहे हैं। इससे पहले उन्होंने एक अन्य संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए कहा था कि प्रकृति के संरक्षण और सम्मान में ही मानवता का वास्तविक कल्याण छिपा है। उन्होंने यह भी संदेश दिया कि ऋतुएं, प्रकृति, धर्म और भारतीय ज्ञान परंपरा मानव जीवन को संतुलित और मंगलमय बनाने की प्रेरणा देती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन, बढ़ते प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव के बीच पर्यावरण संरक्षण आज वैश्विक प्राथमिकता बन चुका है। ऐसे समय में प्रकृति के प्रति जागरूकता और जनभागीदारी को बढ़ावा देना सतत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।

By UJAGAR

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