2020 में दिल्ली दंगों के दौरान IB अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत 5 को उम्रकैद की सजा सुनाई. शुक्रवार (31 जुलाई) को सजा का ऐलान करने से पहले जज ने कहा कि यह बहुत गंभीर घटना थी. अंकित शर्मा की बुरी तरह से हत्या की गई. उनकी बॉडी जानवर की तरह छोड़ दी गई थी. कोर्ट ने कहा कि यह घटना समाज को झकझोर देने वाली थी. जिस तरह से यह पूरी घटना हुई, उसने समाज को सोचने पर मजबूर किया. अदालत ने कहा कि अपराध को अंजाम देने का तरीका अत्यंत क्रूर था. कोर्ट ने कहा कि हमला इतना भीषण और निर्मम था कि पीड़ित की मौत के बाद भी उसका शव घसीटकर दोषी चांद बाग ले गए और उसे नाले में फेंक दिया. दिल्ली पुलिस और पीड़ित परिवार ने सभी दोषियों के लिए मौत की सजा की मांग की थी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह की अदालत ने ताहिर हुसैन को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 (हत्या), 365, 147, 148, 149, 153ए और 188 के तहत दोषी ठहराया। हालांकि, अदालत ने उन्हें धारा 120बी (आपराधिक साजिश) और धारा 129 के आरोपों से बरी कर दिया।मामले में अदालत ने साक्ष्यों, प्रत्यक्ष एवं परिस्थितिजन्य तथ्यों और अभियोजन पक्ष की दलीलों पर विचार करने के बाद सजा का आदेश सुनाया। यह मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़की सांप्रदायिक हिंसा से जुड़ा है। उस दौरान नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के समर्थन और विरोध को लेकर कई इलाकों में हिंसक झड़पें हुई थीं। इन घटनाओं में 50 से अधिक लोगों की जान गई थी और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। इसी हिंसा के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा लापता हो गए थे। बाद में उनका शव एक नाले से बरामद हुआ। शव मिलने के बाद उन्हें जीटीबी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अंकित शर्मा के लापता होने के बाद उनके पिता ने दयालपुर थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी। बाद में शव मिलने के बाद मामले को हत्या में बदल दिया गया और विस्तृत जांच शुरू हुई।जांच के दौरान पुलिस ने कई लोगों को आरोपी बनाया। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि दंगों के दौरान अंकित शर्मा को घेरकर उनकी हत्या की गई और बाद में शव को नाले में फेंक दिया गया। इस मामले में ताहिर हुसैन, नाजिम और कासिम समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ताहिर हुसैन, नाजिम और कासिम को छोड़कर अन्य कुछ आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है।ताहिर हुसैन की जमानत याचिका भी पूर्व में दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज कर दी थी, जिसके बाद वह न्यायिक हिरासत में रहे। ताहिर हुसैन मूल रूप से उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के पौरारा गांव के रहने वाला हैं। वर्ष 2017 में आम आदमी पार्टी के टिकट पर नगर निगम चुनाव जीतकर पार्षद बना। चुनावी हलफनामे में करोड़ों रुपये की संपत्ति घोषित की थी।फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान नाम सामने आने के बाद मामला राजनीतिक रूप से भी काफी चर्चा में रहा। आरोप लगने के बाद आम आदमी पार्टी ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था। उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फरवरी 2020 में हुई सांप्रदायिक हिंसा देश के सबसे चर्चित घटनाक्रमों में से एक रही। इस हिंसा में कई लोगों की मौत हुई थी और बड़ी संख्या में संपत्तियों को नुकसान पहुंचा था। अंकित शर्मा हत्याकांड उसी हिंसा से जुड़े प्रमुख मामलों में शामिल रहा, जिसकी सुनवाई लंबे समय तक अदालत में चली। अब कड़कड़डूमा कोर्ट द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा के बाद इस मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी फैसला सामने आया है।
