जैसे ही गर्मी बढ़ रही थी दिल्ली और उत्तरी भारत के कुछ हिस्सों में अचानक हुई बारिश ने मौसम को ठंडा कर दिया. इस मौसम ने लोगों को राहत भी दी और सवालों के बीच भी डाल दिया. सोशल मीडिया पर इस बदलते मौसम को बिल गेट्स और आर्टिफिशियल रेन के एक्सपेरिमेंट से जोड़ा जा रहा है. यह दावा काफी तेजी से वायरल हो रहा है. इसके बाद लोग इस बात को सोचने पर मजबूर हो गए हैं कि क्या यह सचमुच प्राकृतिक बारिश थी या फिर कोई इंसानी प्रयोग? आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे का सच. सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे पोस्ट वायरल हो रहे हैं जिनमें यह बताया जा रहा है कि दिल्ली में अचानक हुई बारिश के पीछे बिल गेट्स का हाथ है. इन पोस्ट में ऐसा दावा किया गया है कि इस क्षेत्र में बारिश करवाने के लिए रासायनिक छिड़काव या फिर गुप्त जलवायु प्रयोगों का इस्तेमाल किया गया था. यह सुनने में काफी अजीब लग सकता है लेकिन इसका कोई भी तथ्यात्मक आधार नहीं है.

कहां से शुरू हुआ यह मामला? 

यह कन्फ्यूजन जलवायु इंजीनियरिंग पर हो रहे शोध के लिए बिल गेट्स के समर्थन से जुड़ा है. खास तौर से एक ऐसी अवधारणा से जिसे स्ट्रेटोस्फेरिक एयरोसोल इंजेक्शन के नाम से जाना जाता है. इस सैद्धांतिक विचार में ऊपरी वायुमंडल में कणों को छोड़ने की बात कही गई है. ताकि वे सूरज की रोशनी को रिफ्लेक्ट कर सकें और ग्लोबल वार्मिंग को कम कर सकें. हालांकि इस शोध का उद्देश्य तापमान को कंट्रोल करना है, न कि बारिश करवाना. साथ ही यह अभी भी काफी हद तक प्रायोगिक चरण में ही है.

SCoPEx प्रोजेक्ट की पूरी जानकारी 

इस शोध से जुड़े प्रोजेक्ट में से एक था SCoPEx. दरअसल इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य इस बात को समझाना था कि क्या वायुमंडल में कैल्शियम कार्बोनेट जैसे धूल के कणों का छिड़काव करके सूरज की रोशनी को वापस अंतरिक्ष में रिफ्लेक्ट किया जा सकता है या नहीं. बिल गेट्स ने इस प्रोजेक्ट को वित्तीय सहायता दी थी. लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि इस प्रोजेक्ट को कभी भी बड़े पैमाने पर लागू ही नहीं किया गया और 2024 में इसे बंद कर दिया गया था. साथ ही इसका भारत से कोई भी लेना-देना नहीं था. 

दिल्ली में बारिश के पीछे की वजह 

भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक दिल्ली एनसीआर और आसपास की जगह में हो रही बारिश की वजह पश्चिम वेस्टर्न डिस्टरबेंस थी. यह पूरी तरह से प्राकृतिक मौसमी घटना है. वेस्टर्न डिस्टरबेंस की उत्पत्ति भूमध्यसागरीय क्षेत्र में होती है और यह भारत की तरफ बढ़ता है. इससे अपने साथ नमी, बादल, बारिश और कभी-कभी ओलावृष्टि भी आती है. ये मौसमी बदलाव सर्दियों के अंत और गर्मियों की शुरुआत में काफी आम होते हैं.

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