पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस को लेकर नया आदेश जारी किया है। इसके तहत मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों के फैकल्टी एवं डॉक्टर मरीज के अस्पताल में भर्ती होने वाले दिन से अगले दो दिनों तक निजी प्रैक्टिस नहीं कर सकेंगे। नए निर्देश के अनुसार मरीज के एडमिशन वाले दिन को भी प्रतिबंध की अवधि में शामिल किया गया है। यानी कुल 72 घंटे तक संबंधित डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस से दूर रहेंगे। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू किए जाने की बात नोटिफिकेशन में कही गई है। स्वास्थ्य विभाग के आदेश की खास बात यह है कि यह पाबंदी उन डॉक्टरों पर भी लागू होगी, जिन्हें पहले से प्राइवेट प्रैक्टिस करने की अनुमति मिली हुई है। विभाग ने अस्पताल में भर्ती मरीजों की शुरुआती चिकित्सा निगरानी को इस फैसले की प्रमुख वजह बताया है। सरकार का मानना है कि अस्पताल में भर्ती होने के शुरुआती समय में मरीज की स्थिति पर लगातार निगरानी जरूरी होती है। डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ने से मरीज की तबीयत में अचानक बदलाव होने पर समय रहते चिकित्सा सहायता दी जा सकेगी और इलाज की प्रक्रिया को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाया जा सकेगा। नोटिफिकेशन की प्रतियां मेडिकल एजुकेशन के निदेशक (DME), स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक (DHS), मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यों, निदेशकों और MSVPs को भेजी गई हैं। संबंधित संस्थानों को आदेश के मुताबिक आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।

By UJAGAR

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