हिंदी दिवस के अवसर पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि भाषा सिर्फ बातचीत का माध्यम नहीं है, बल्कि यह किसी भी समाज की संस्कृति, संस्कार, ज्ञान, परंपरा और राष्ट्रीय चेतना को आगे बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने हिंदी के साथ सभी भारतीय भाषाओं को देश की सांस्कृतिक शक्ति बताते हुए इनके विकास और विस्तार पर जोर दिया। अमित शाह ने कहा कि भारत की भाषाई विविधता उसकी सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत की पहचान है। अलग-अलग भाषाएं और बोलियां देश की ‘विविधता में एकता’ की भावना को मजबूत करती हैं। उन्होंने कहा कि हिंदी को किसी दूसरी भारतीय भाषा के मुकाबले की भाषा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। हिंदी देश की अलग-अलग भाषाओं और समुदायों के बीच संवाद और समन्वय की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। गृह मंत्री ने स्वतंत्रता आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि ‘स्वराज, स्वदेशी और स्वभाषा’ के विचारों ने उस दौर में देशवासियों के भीतर राष्ट्रीय भावना को मजबूत किया। हिंदी ने जन-जागरण और स्वतंत्रता आंदोलन के विचारों को आम लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ के विचारों का उल्लेख करते हुए भाषा को सामान्य जन के जीवन, श्रम और संवेदनाओं से जोड़ने की आवश्यकता बताई। अमित शाह ने कहा कि वर्ष 2026 राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के स्मरण का भी विशेष अवसर है। उन्होंने कहा कि भारत आज ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है। विकास की इस यात्रा में देश की विरासत, संस्कृति और भाषाई आत्मविश्वास की महत्वपूर्ण भूमिका है। हिंदी दिवस का संबंध भारत के संविधान निर्माण के इतिहास से भी जुड़ा है। 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को देवनागरी लिपि में संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। यह निर्णय स्वतंत्र भारत की लोकतांत्रिक और सांस्कृतिक यात्रा का एक अहम पड़ाव माना जाता है। इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। गृह मंत्री ने राजभाषा हिंदी को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ने की दिशा में उठाए जा रहे कदमों का भी उल्लेख किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकास भी, विरासत भी’ के मंत्र के अनुरूप भारतीय भाषाओं के लिए तकनीकी संसाधनों को विकसित किया जा रहा है। अमित शाह के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ‘भारती’ तकनीक भारतीय भाषाओं के बीच संवाद को आसान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य अलग-अलग भारतीय भाषाओं के बीच संपर्क को और सहज बनाना है। वर्ष 2024 में स्थापित भारतीय भाषा अनुभाग केंद्र और राज्यों के बीच प्रशासनिक संवाद को सुगम बनाने की दिशा में काम कर रहा है। इससे भारतीय भाषाओं के इस्तेमाल को प्रशासनिक स्तर पर बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है। गृह मंत्री ने डिजिटल शब्दकोश ‘हिंदी शब्द सिंधु’ को भी महत्वपूर्ण पहल बताया। इसमें 8.27 लाख से अधिक प्रविष्टियां हैं। यह डिजिटल संसाधन हिंदी भाषा में ज्ञान के विस्तार और शब्द-संपदा को साझा करने का एक बड़ा माध्यम बन रहा है। अमित शाह ने कहा कि हिंदी दिवस केवल अपनी भाषा पर गर्व करने का अवसर नहीं है, बल्कि अपनी भाषा में काम करने और संविधान निर्माताओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का भी दिन है। उन्होंने देशवासियों से हिंदी के साथ सभी भारतीय भाषाओं को मजबूत बनाने का संकल्प लेने की अपील की, ताकि भारतीय भाषाएं एक सशक्त और आत्मनिर्भर भारत की प्रभावी अभिव्यक्ति बन सकें।
