पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) के असली प्रतिनिधित्व और उसके आधिकारिक चुनाव चिह्न ‘जोड़ा फूल’ पर अधिकार को लेकर जारी विवाद के बीच चुनाव आयोग ने आज, गुरुवार को दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों की सुनवाई बुलाई है। चुनाव आयोग ने नई दिल्ली स्थित निर्वाचन सदन में दोपहर 3 बजे ऋतव्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले विद्रोही तृणमूल गुट और शाम 4 बजे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले कालीघाट-तृणमूल गुट के प्रतिनिधियों को उपस्थित होने के लिए कहा है। दोनों पक्षों को अपने साथ अधिकतम 5-5 सदस्यों की प्रतिनिधि समिति लाने की अनुमति दी गई है।विद्रोही शिविर की ओर से ऋतव्रत बनर्जी, अरूप रॉय, चंद्रिमा भट्टाचार्य, अखरुज्जमां और उनके वकील दिल्ली रवाना हो चुके हैं। वहीं, कालीघाट गुट की ओर से वकील-सांसद कल्याण बनर्जी के साथ जाने वाले अन्य सदस्यों की सूची स्पष्ट नहीं हो सकी है। दोनों ही पक्षों ने बुधवार दोपहर 3 बजे की तय समय-सीमा के भीतर अपने अंतिम दस्तावेज आयोग के समक्ष जमा करा दिए थे। पूर्व मेदिनीपुर जिले के नंदीग्राम और मुर्शीदाबाद जिले के रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव के लिए दोनों ही गुटों के प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किया है और दोनों ही पक्षों ने ‘जोड़ा फूल’ प्रतीक पर दावा ठोका है। आज नामांकन की जांच (स्क्रूटनी) होनी है और 19 सितंबर नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि है। पूर्व चुनाव अधिकारियों का मानना है कि यदि आयोग 19 सितंबर से पहले निर्णय नहीं लेता है, तो अंतिम उम्मीदवार सूची का प्रकाशन अटक सकता है। इसलिए आयोग को आज रात या शुक्रवार तक इस पर अपना रुख साफ करना होगा। कालीघाट गुट के प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा कि यह मामला आयोग और अदालत के विचाराधीन है, लेकिन जनता की असली प्रतिनिधि ममता बनर्जी ही हैं। उन्होंने इंदिरा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रतीक से ज्यादा नेता का चेहरा महत्वपूर्ण होता है। रेजीनगर से उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी के अनुसार, ममता बनर्जी ने कहा है कि जब तक प्रतीक की स्थिति साफ नहीं होती, वे चुनाव प्रचार में नहीं उतरेंगी।दूसरी ओर, विद्रोही गुट के नेता ऋतव्रत बनर्जी ने कहा कि उन्हें आयोग पर पूरा भरोसा है। इसके साथ ही, कालीघाट गुट द्वारा 10 विद्रोही विधायकों को अयोग्य (डिस्क्वॉलिफाई) ठहराने के लिए विधानसभा सचिवालय के माध्यम से भेजे गए नोटिस को ऋतव्रत ने तकनीकी रूप से त्रुटिपूर्ण बताते हुए खारिज किया है।
