इंडिगो की उड़ान 6E4 ने 22 सितंबर की रात लंदन के हीथ्रो हवाई अड्डे से नई दिल्ली के लिए उड़ान भरी थी। बोइंग 787-9 ड्रीमलाइनर से संचालित यह विमान रनवे 27R से करीब 20:05 बजे ब्रिटिश समय के अनुसार रवाना हुआ। शुरुआती चरण में विमान ने सामान्य रूप से उड़ान भरी और इंग्लिश चैनल की दिशा में आगे बढ़ा, लेकिन कुछ देर बाद चालक दल ने विमान की चढ़ाई रोक दी। उड़ान से जुड़े आंकड़ों के अनुसार विमान करीब 24,000 फीट की ऊंचाई पर पहुंचने के बाद आगे नहीं चढ़ा और इसके बाद वापस ब्रिटेन की ओर मुड़ गया। घटना के दौरान विमान के चालक दल ने हवाई यातायात नियंत्रण को आपात स्थिति की सूचना दी। विमान के ट्रांसपोंडर पर 7700 कोड सक्रिय किया गया, जिसे सामान्य विमानन आपात स्थिति के संकेत के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इस संकेत के बाद हवाई यातायात नियंत्रण विमान को प्राथमिकता के आधार पर संभालता है, ताकि उसे सुरक्षित रूप से निकटतम उपयुक्त हवाई अड्डे तक पहुंचाया जा सके। फ्लाइट ट्रैकिंग आंकड़ों में भी विमान के दिल्ली जाने के बजाय वापस हीथ्रो की ओर मुड़ने की पुष्टि होती है। उड़ान का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब विमान इंग्लिश चैनल के ऊपर करीब 24,000 फीट की ऊंचाई पर पहुंचा। इसके बाद विमान ने अपनी निर्धारित चढ़ाई जारी नहीं रखी और कुछ ही समय में लंदन की दिशा में वापसी शुरू कर दी। ऐसी स्थिति में चालक दल के लिए सबसे अहम प्राथमिकता विमान को ऐसी जगह ले जाना होती है जहां आवश्यक हवाई यातायात सहायता, रनवे और जमीन पर आपात सेवाएं उपलब्ध हों। हीथ्रो से उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद समस्या सामने आने के कारण विमान के पास उसी हवाई अड्डे पर लौटने का व्यावहारिक विकल्प मौजूद था। उपलब्ध फ्लाइट-ट्रैकिंग विवरण के मुताबिक विमान ने आपात संकेत सक्रिय करने के बाद ब्रिटिश हवाई क्षेत्र की ओर वापसी की। हवाई यातायात नियंत्रकों ने उसे प्राथमिकता दी और सुरक्षित लैंडिंग के लिए मार्ग उपलब्ध कराया। रिपोर्टों के अनुसार विमान करीब 78 मिनट बाद हीथ्रो पहुंचा और लगभग 21:23 बजे रनवे 27L पर उतरा। इसके बाद आपात सेवाओं की मौजूदगी में विमान को अलग स्थान पर ले जाया गया, जहां उसकी आगे की तकनीकी जांच की जानी थी। विमान में 7700 ट्रांसपोंडर कोड का इस्तेमाल यात्रियों के लिए अपने आप में किसी दुर्घटना का संकेत नहीं होता, बल्कि यह हवाई यातायात नियंत्रण को बताता है कि विमान को सामान्य उड़ान की तुलना में तत्काल प्राथमिकता या विशेष सहायता की आवश्यकता है। इसके सक्रिय होते ही नियंत्रकों को विमान की स्थिति का स्पष्ट संकेत मिलता है और उसे सुरक्षित लैंडिंग के लिए प्राथमिकता दी जा सकती है। 6E4 के मामले में भी यही प्रक्रिया अपनाई गई और विमान को वापस हीथ्रो जाने की अनुमति दी गई। घटना के कारण को लेकर शुरुआती रिपोर्टों में कुछ अंतर दिखाई देते हैं। कुछ विमानन रिपोर्टों ने इसे तकनीकी समस्या बताया है, जबकि एक अन्य रिपोर्ट में चालक दल की ओर से विमान में धुआं होने की सूचना का उल्लेख किया गया है। हालांकि उपलब्ध पुष्ट जानकारी के आधार पर इंडिगो ने उड़ान में तकनीकी समस्या के कारण विमान के वापस लौटने की पुष्टि की है। इसलिए धुएं के स्रोत या तकनीकी खराबी के किसी विशिष्ट हिस्से को अंतिम कारण बताना अभी जल्दबाजी होगी। आपात स्थिति घोषित किए जाने के बावजूद विमान ने सुरक्षित तरीके से हीथ्रो पर वापसी की। रिपोर्टों के अनुसार विमान के उतरने के बाद आपात सेवाएं उसके पास मौजूद थीं और उसे अग्निशमन वाहनों की निगरानी में अलग स्थान तक ले जाया गया। उपलब्ध रिपोर्टों में यात्रियों या चालक दल के किसी सदस्य के घायल होने की पुष्टि नहीं की गई है। इस घटना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही रहा कि चालक दल ने समस्या सामने आने के बाद समय रहते वापसी का निर्णय लिया और विमान को सुरक्षित रूप से वापस उतारा। विमान की सुरक्षित वापसी के बाद उसे तत्काल नियमित सेवा में भेजने के बजाय रखरखाव संबंधी जांच के लिए रोका गया। इंडिगो के अनुसार आवश्यक जांच और मंजूरी मिलने के बाद ही विमान को दोबारा सेवा में लगाया जाएगा। विमानन क्षेत्र में किसी भी तकनीकी या आपात स्थिति के बाद इस तरह की जांच का उद्देश्य समस्या के कारण की पहचान करना और विमान की उड़ान-योग्यता सुनिश्चित करना होता है। लंदन-नई दिल्ली मार्ग की यह उड़ान लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय सेवा है और इसमें बड़ी संख्या में यात्री सवार थे। विमान के वापस लौटने से यात्रियों की निर्धारित यात्रा बाधित हुई और दिल्ली पहुंचने की पूरी योजना प्रभावित हुई। उड़ान संख्या 6E4 के 22 सितंबर के परिचालन रिकॉर्ड में इसे वापस हीथ्रो लौटने वाली उड़ान के रूप में दर्ज किया गया है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि विमान ने अपनी निर्धारित अंतरराष्ट्रीय यात्रा पूरी नहीं की। ऐसी परिस्थितियों में यात्रियों के लिए अगली उड़ान की व्यवस्था, पुनः टिकट आवंटन और सामान से संबंधित प्रक्रियाएं एयरलाइन के सामने प्रमुख जिम्मेदारियां बन जाती हैं। विमान की तकनीकी जांच पूरी होने तक संबंधित उड़ान का संचालन दूसरे विमान से करने की आवश्यकता भी पड़ सकती है। 23 सितंबर के लिए उपलब्ध उड़ान रिकॉर्ड में 6E4 के लिए दूसरे बोइंग 787-9 विमान का विवरण दिखाई देता है, जिससे संकेत मिलता है कि मार्ग का नियमित परिचालन जारी रखने की व्यवस्था की गई। घटना के बाद सबसे महत्वपूर्ण सवाल अब यह है कि विमान में वास्तविक समस्या क्या थी और वह किस वजह से सामने आई। उपलब्ध जानकारी अभी इस प्रश्न का अंतिम उत्तर नहीं देती। तकनीकी खराबी के अलग-अलग संभावित कारणों की जांच विमान के रखरखाव दल और संबंधित विशेषज्ञों द्वारा की जाएगी। यदि विमान में धुएं की सूचना की पुष्टि होती है, तो उसके स्रोत, संबंधित प्रणाली और उड़ान के दौरान उसके प्रभाव की भी विस्तृत जांच जरूरी होगी। फिलहाल किसी एक कारण को अंतिम निष्कर्ष मानना उचित नहीं होगा। यह घटना यह भी दिखाती है कि लंबी दूरी की उड़ानों में आपात स्थिति से निपटने के लिए निर्धारित प्रक्रियाएं किस तरह काम करती हैं। 6E4 ने दिल्ली की ओर अपनी यात्रा जारी रखने के बजाय समस्या सामने आने पर वापसी का फैसला किया, 7700 आपात संकेत सक्रिय किया और हवाई यातायात नियंत्रण की प्राथमिकता के साथ हीथ्रो में सुरक्षित लैंडिंग की। अब विमान की तकनीकी जांच और आवश्यक मंजूरियां यह तय करेंगी कि वह कब दोबारा यात्री सेवा में लौटेगा।

By UJAGAR

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