पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा उपचुनाव से पहले ‘खाम’ चुनाव चिह्न को लेकर चल रहा विवाद अब कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले तक पहुंच गया है। इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के विधायक नौशाद सिद्दीकी की ओर से दायर याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। याचिका में चुनाव आयोग के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत ‘खाम’ चिह्न को डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस को आवंटित किया गया था। नौशाद सिद्दीकी की अगुवाई वाली ISF का कहना था कि पार्टी ने 2026 के विधानसभा चुनाव में ‘खाम’ चुनाव चिह्न के साथ चुनाव लड़ा था। इसके बाद नंदीग्राम और रेजिनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए भी पार्टी इसी चिह्न का इस्तेमाल करना चाहती थी। इसी मांग को लेकर ISF ने चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया था। चुनाव आयोग ने उपचुनाव के लिए ISF को ‘अलमारी’ चुनाव चिह्न आवंटित किया। वहीं, ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाली डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस को ‘खाम’ चिह्न दिया गया। इसी बदलाव को लेकर नौशाद सिद्दीकी ने आपत्ति जताई थी। ISF की दलील थी कि कुछ महीने पहले जिस चिह्न के साथ उसने विधानसभा चुनाव लड़ा था, उसे उसी उपचुनाव में किसी दूसरी पार्टी को दिए जाने से मतदाताओं में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। इस मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति कृष्णा राव की पीठ ने चुनाव आयोग से कई सवाल किए थे। अदालत ने पूछा था कि जब बड़ी संख्या में मुक्त चुनाव चिह्न उपलब्ध थे, तो ISF द्वारा हाल में इस्तेमाल किए गए ‘खाम’ चिह्न को ही दूसरी पार्टी को आवंटित करने का फैसला क्यों किया गया। अदालत ने यह भी पूछा था कि 17 सितंबर को ISF की ओर से ‘खाम’ चिह्न के लिए आवेदन मौजूद होने के बावजूद उस पर किस तरह विचार किया गया। चुनाव आयोग की ओर से अदालत में कहा गया था कि ISF एक पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल है और उसे किसी विशेष चुनाव चिह्न पर स्थायी अधिकार हासिल नहीं है। आयोग के अनुसार, विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद पहले आवंटित मुक्त चिह्न दोबारा आवंटन के लिए उपलब्ध हो जाते हैं। आयोग ने यह भी कहा कि आम चुनाव और उपचुनाव अलग-अलग चुनावी प्रक्रियाएं हैं और उपचुनाव में मुक्त चिह्नों के आवंटन का अधिकार आयोग के पास है। ISF की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास रंजन भट्टाचार्य ने तर्क दिया था कि चुनाव आयोग के पास भले ही चिह्न आवंटित करने का अधिकार हो, लेकिन उस अधिकार का इस्तेमाल तर्कसंगत और उचित तरीके से किया जाना चाहिए। पार्टी की ओर से यह भी कहा गया कि उपचुनाव उसी विधानसभा कार्यकाल के दौरान हो रहा है, इसलिए कुछ महीने पहले इस्तेमाल किए गए चुनाव चिह्न को अचानक दूसरी पार्टी को देने से मतदाताओं के बीच भ्रम पैदा होने की आशंका है। पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजिनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है, जबकि मतगणना 9 अक्टूबर को निर्धारित है। नौशाद सिद्दीकी ISF नंदीग्राम उपचुनाव में मैदान में हैं। चुनाव आयोग के फैसले के बाद पार्टी ‘अलमारी’ चुनाव चिह्न के साथ चुनाव लड़ रही है।

By UJAGAR

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