पश्चिम बंगाल में स्वर्ण कारोबारी स्वपन कामिल्या की हत्या के मामले में आरोपी पूर्व BDO प्रशांत बर्मन ने कलकत्ता हाईकोर्ट की ओर से तय समयसीमा के भीतर आत्मसमर्पण नहीं किया। अदालत के निर्देश के बावजूद उनके फरार रहने से पुलिस और जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। मामले में अब 14 दिसंबर को CID को जांच की प्रगति रिपोर्ट पेश करनी है। पश्चिम बंगाल में स्वर्ण कारोबारी की हत्या के मामले में आरोपी पूर्व ब्लॉक विकास अधिकारी (BDO) प्रशांत बर्मन एक बार फिर चर्चा में हैं। कलकत्ता हाईकोर्ट ने उन्हें आत्मसमर्पण करने के लिए 48 घंटे का समय दिया था। अदालत के निर्देश के मुताबिक, 8 अक्टूबर को दोपहर 3:30 बजे तक उन्हें पुलिस के सामने पेश होना था। लेकिन निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी उनके विधाननगर दक्षिण थाने में पहुंचने की खबर सामने नहीं आई। इससे उनकी गिरफ्तारी और अब तक की पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रशांत बर्मन पर स्वर्ण कारोबारी स्वपन कामिल्या के अपहरण और हत्या के मामले में शामिल होने का आरोप है। इस मामले में उनकी अग्रिम जमानत पहले हाईकोर्ट ने रद्द कर दी थी। इसके बाद जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने भी उन्हें निचली अदालत में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद वह तय समयसीमा में पेश नहीं हुए। लगातार अदालती निर्देशों के बाद भी उनके सामने नहीं आने से मामले ने गंभीर रूप ले लिया है। यह मामला सॉल्टलेक के दत्ताबाद निवासी स्वर्ण कारोबारी स्वपन कामिल्या की हत्या से जुड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार, 28 अक्टूबर 2025 को उनके लापता होने की सूचना सामने आई थी और अगले दिन न्यू टाउन के यात्रा गाछी इलाके में उनका शव बरामद हुआ था। इस मामले में प्रशांत बर्मन का नाम प्रमुख आरोपियों में शामिल है। हालांकि, आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में होना बाकी है। प्रशांत बर्मन के लंबे समय से फरार रहने पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी. घुगे की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने राज्य सरकार को उनका वेतन और सेवा संबंधी लाभ रोकने का निर्देश दिया। साथ ही, निर्धारित समयसीमा में आत्मसमर्पण नहीं करने पर उनकी संपत्तियों की सूची तैयार कर उन्हें जब्त करने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा गया। अदालत ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि एक सरकारी अधिकारी अदालतों के निर्देशों का पालन नहीं करने के बावजूद वेतन कैसे प्राप्त कर सकता है। प्रशांत बर्मन इससे पहले मई 2026 में न्यू टाउन इलाके में एक सड़क दुर्घटना के मामले में भी गिरफ्तार हुए थे। उन पर आरोप था कि उनकी गाड़ी ने एक राहगीर को टक्कर मारी थी। हालांकि, इस मामले में उन्हें अदालत से जमानत मिल गई थी। इसके बाद स्वर्ण कारोबारी की हत्या के मामले में उनकी गिरफ्तारी नहीं होने को लेकर पुलिस की भूमिका पर फिर सवाल उठे। प्रशांत बर्मन की गिरफ्तारी नहीं होने पर वकीलों के एक वर्ग ने पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। सवाल यह भी है कि जब आरोपी की ओर से अदालत में वकील पैरवी कर रहे हैं, तो जांच एजेंसियां उनकी मौजूदगी का पता लगाने में सफल क्यों नहीं हो पा रही हैं। हालांकि, प्रशांत बर्मन को किसी व्यक्ति या समूह का संरक्षण प्राप्त होने की बात की अभी तक कोई पुष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में इस पहलू पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। अब इस मामले में अगली महत्वपूर्ण तारीख 14 दिसंबर 2026 है। हाईकोर्ट ने CID को जांच की प्रगति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। ऐसे में आने वाले समय में जांच एजेंसी की कार्रवाई, आरोपी की तलाश और अदालत के आदेशों के अनुपालन पर नजर रहेगी। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि लगातार अदालती निर्देशों के बावजूद प्रशांत बर्मन की गिरफ्तारी कब होगी।

By UJAGAR

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