पड़ोसी देश भूटान में ग्लेशियल झील फटने से अचानक बाढ़ आ गई। गुरुवार रात गासा जिले में शिंताफू ग्लेशियर झील से ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) की घटना हुई। पानी के तेज बहाव में गासा का मशहूर गर्म पानी का कुंड ‘गासा त्शाचु’ पूरी तरह बह गया। वहीं, पुनाखा-गासा हाईवे का एक हिस्सा टूटने से यातायात बंद कर दिया गया है। लाआ को जोड़ने वाली सड़क को भी नुकसान पहुंचा है। इस घटना के बाद भारत के पश्चिम बंगाल और असम में भी अलर्ट जारी किया गया है। पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार में 10 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में पहुंचाया गया है। जानकारी के मुताबिक, गुरुवार रात करीब 8:15 बजे शिंताफू ग्लेशियर झील से अचानक पानी निकलने लगा। इसके बाद तेज बहाव के साथ बाढ़ का पानी आसपास के इलाकों में फैल गया।यह झील भूटान की 17 बेहद संवेदनशील ग्लेशियर झीलों में शामिल है। बाढ़ के पानी ने स्थानीय सड़कों और दूसरे बुनियादी ढांचों को नुकसान पहुंचाया है।इस घटना में गासा का प्रसिद्ध गर्म पानी का कुंड ‘गासा त्शाचु’ पूरी तरह बह गया। वहीं, पुनाखा-गासा हाईवे का हिस्सा टूटने के कारण इस मार्ग पर ट्रैफिक रोक दिया गया है। लाआ को जोड़ने वाली सड़क भी क्षतिग्रस्त हुई है। ग्लेशियर झील से पानी निकलने के बाद संकोश नदी का जलस्तर बढ़ गया है। यह नदी भूटान से निकलकर भारत में प्रवेश करती है और पश्चिम बंगाल तथा असम के इलाकों से होकर गुजरती है।शुरुआती चेतावनी में आशंका जताई गई थी कि झील से निकला बाढ़ का पानी 6 से 8 घंटे के भीतर भारत-भूटान सीमा तक पहुंच सकता है।यह पानी मो छू नदी के रास्ते संकोश नदी में पहुंचता है। इसके बाद भारत के सीमावर्ती इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ने की आशंका जताई गई। भूटान में ग्लेशियर झील फटने के बाद पश्चिम बंगाल और असम के नदी किनारे बसे इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी गई है।पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार में 10 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में पहुंचाया गया है। प्रशासन सायरन बजाकर लोगों को संभावित खतरे के प्रति सतर्क कर रहा है।वहीं, असम के धुबरी समेत संकोश नदी के आसपास के इलाकों में भी निगरानी बढ़ा दी गई है।स्थिति से निपटने के लिए NDRF, SDRF और आपदा प्रबंधन की टीमें तैनात की गई हैं। ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF एक तरह की अचानक आने वाली बाढ़ है। पहाड़ों में ग्लेशियरों के पिघलने से बनी झीलों में पानी जमा होता रहता है।जब झील को रोकने वाला प्राकृतिक बांध टूट जाता है या पानी अचानक बाहर निकलने लगता है, तो तेज रफ्तार से पानी नीचे की ओर बहता है। इससे रास्ते में आने वाली सड़कें, पुल, मकान और अन्य ढांचे क्षतिग्रस्त हो सकते हैं।भूटान में हुई इस घटना के बाद भारत के सीमावर्ती इलाकों में भी निगरानी बढ़ा दी गई है।

By UJAGAR

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