पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर छिड़ा आंतरिक घमासान अब खुलकर बगावत के रूप में सामने आ गया है। कभी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सबसे खास और वीरभूम जिले के ‘बेताज बादशाह’ माने जाने वाले अनुब्रत मंडल (केष्टो) ने पार्टी के सर्वभारतीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के खिलाफ बेहद विस्फोटक आरोप लगाए हैं। गौ-तस्करी (Cow Smuggling) मामले में तिहाड़ जेल समेत करीब ढाई साल सलाखों के पीछे बिताने वाले अनुब्रत मंडल ने बुधवार को सीधे तौर पर अपनी जेल यात्रा के लिए अभिषेक बनर्जी को जिम्मेदार ठहराया। ममता बनर्जी का साथ छोड़ अब बागी ‘ऋतब्रत बनर्जी गुट’ में शामिल हो चुके अनुब्रत ने दावा किया कि आने वाले दिनों में तृणमूल में कोई नहीं बचेगा और यह पार्टी पूरी तरह खत्म हो जाएगी। बुधवार को गोलपार्क में ‘ऋत-तृणमूल’ (Ritabrata TMC Camp) की अहम बैठक में शामिल होने पहुंचे अनुब्रत मंडल ने पत्रकारों के सामने बयानों का बड़ा बम फोड़ा। उन्होंने कहा:”मुझे जेल भेजने के पीछे एकमात्र जिम्मेदार अभिषेक बनर्जी हैं। उन्हीं के कारण मुझे ढाई साल की जेल काटनी पड़ी।” यही नहीं, अनुब्रत ने वित्तीय लेन-देन को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि वीरभूम से सरकार को साढ़े तीन करोड़ रुपये का राजस्व (रेवेन्यू) मिलता था, लेकिन बाद में कोयले के नाम पर रोजाना 40 लाख रुपये देने पड़ते थे। अनुब्रत ने भविष्यवाणी करते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर जो भी विसंगतियां और समस्याएं हैं, उन सबके पीछे अभिषेक बनर्जी ही हैं। अब पार्टी में जो हालात हैं, उन्हें देखते हुए बहुत जल्द ममता बनर्जी के खेमे में कोई नहीं बचेगा। बंगाल की राजनीति में यह बगावत उस वक्त और बड़ी हो गई जब बुधवार को ही पूर्व मंत्री और कद्दावर नेता मदन मित्रा भी औपचारिक रूप से ऋत-तृणमूल (ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट) में शामिल हो गए। गोलपार्क की बैठक में ऋतब्रत बनर्जी, अनुब्रत मंडल और मदन मित्रा को एक साथ देखा गया। बता दें कि ऋत-तृणमूल गुट ने गत 11 जुलाई को ही अनुब्रत मंडल को अपने गुट की ओर से वीरभूम जिले का अध्यक्ष घोषित किया था। इस बीच, पार्टी में मचे इस जबर्दस्त घमासान के बाद बुधवार शाम मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद फेसबुक लाइव पर आईं। बेहद भावुक और आक्रामक लहजे में ममता बनर्जी ने कहा: “मैं उन गद्दारों की तरफ से जनता से हाथ जोड़कर माफी मांगती हूं जिन्होंने पीठ में छुरा घोंपा है। अगर मैंने एजेंसियों के साथ कोई सेटिंग की होती, तो मुझे और मेरी पार्टी को आज यह सब अत्याचार नहीं सहना पड़ता।” वीरभूम जिले में संगठन के मामले में अनुब्रत मंडल हमेशा से ‘एकमेव द्वितीयम’ (एकमात्र सेनापति) रहा है। गौ-तस्करी मामले में जेल से रिहा होने के बाद भी ममता बनर्जी ने उनका जिला अध्यक्ष पद बरकरार रखा था। हालिया लोकसभा चुनाव में भी वीरभूम की दोनों सीटों पर टीएमसी को मिली जीत अनुब्रत के मजबूत संगठन के दम पर ही आई थी। लेकिन, चुनाव के बाद जिले में बढ़ते गुटीय संघर्ष को देखते हुए ममता बनर्जी ने वीरभूम की कमान अकेले अनुब्रत को सौंपने के बजाय एक ‘कोर कमेटी’ का गठन कर दिया, जिसमें अनुब्रत को महज एक सदस्य बनाकर रख दिया गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केष्टो की नाराजगी इसी बात से शुरू हुई थी, जो आखिरकार 2026 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एक खुली बगावत के रूप में बाहर आ गई है।
