बंगाल में पहले फेज़ का चुनाव 23 अप्रैल को है। उससे तीन दिन पहले पूरे राज्य में शराब की दुकानें बंद कर दी गईं। इस बात पर भी चर्चा हो रही है कि जिन इलाकों में वोट नहीं हैं, वहां भी यही नियम क्यों लागू किए गए। मंगलवार शाम को राज्य के चीफ इलेक्शन ऑफिसर मनोज अग्रवाल ने इस पर हैरानी जताई। उन्होंने दावा किया कि जिन इलाकों में वोट हैं, वहां शराब की दुकानें बंद होनी चाहिए। लेकिन उन्हें नहीं पता कि पूरे बंगाल में दुकानें क्यों बंद की गईं। मनोज ने इस घटना की ज़िम्मेदारी एक्साइज कमिश्नर पर डाली। मनोज अग्रवाल ने असल में क्या कहा? इस दिन उन्होंने कहा, “इलेक्शन कमीशन (ECI) का नियम है कि जहां वोट हैं, वहां शराब की दुकानें 48 घंटे पहले बंद होनी चाहिए। पहले फेज़ में 152 सीटों पर वोटिंग होगी। वहां आज से शराब की दुकानें बंद होनी चाहिए।” इससे सवाल उठता है कि फिर कोलकाता समेत पूरे राज्य में शराब की दुकानें क्यों बंद कर दी गईं? थोड़ी हैरानी जताते हुए उन्होंने कहा, “मैं भी यह सुनकर हैरान हूं। मैं एक्साइज कमिश्नर से पूछूंगा कि उन्होंने यह ऑर्डर क्यों जारी किया?” यानी उनका दावा है कि यह ऑर्डर उनका नहीं है। हालांकि नियमों के मुताबिक, एक्साइज कमिश्नर के पास यह अधिकार है कि वह चाहें तो किसी भी इलाके में शराब की दुकानें बंद करने का ऑर्डर दे सकते हैं। गौरतलब है कि नेशनल इलेक्शन कमीशन ने ‘वेस्ट बंगाल इलेक्शन 2026’ की जंग में एक के बाद एक फैसले लिए हैं। चुनाव आयोग का दावा है कि सभी फैसले फेयर और फ्री चुनाव के मकसद से लिए गए हैं। पहले फेज से तीन दिन पहले और दूसरे फेज से 9 दिन पहले राज्य की सभी शराब की दुकानें बंद कर दी गई हैं। हालांकि कमीशन आमतौर पर वोटिंग से 48 घंटे पहले संबंधित इलाकों में बार और शराब की दुकानें बंद कर देता है। इस बार उस नियम में बदलाव किया गया है। बताया गया है कि पहले फेज में 20-23 अप्रैल तक पूरे राज्य में शराब की दुकानें और बार बंद रहेंगे। दूसरे फेज में 25-29 अप्रैल तक शराब की दुकानें और बार बंद रहेंगे। 4 मई को काउंटिंग वाले दिन पूरे दिन शराब की दुकानें और बार बंद रहेंगे।
