प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने गुजरात के गिर सोमनाथ में आयोजित सोमनाथ अमृत महोत्सव को संबोधित किया। इस ऐतिहासिक अवसर पर उन्होंने महादेव के प्रति अपनी गहरी आस्था व्यक्त की और सोमनाथ मंदिर के गौरवशाली, शाश्वत और अविनाशी स्वरूप को याद किया। पीएम मोदी जी ने कहा कि पोखरण परीक्षणों के बाद पूरी दुनिया भारत को दबाने के लिए मैदान में उतर आई थी। 11 मई के बाद आर्थिक प्रतिबंध और दबाव बढ़ गए, लेकिन 13 मई को दो और परमाणु परीक्षण कर अटल जी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने दुनिया को बता दिया कि भारत की राजनीतिक इच्छाशक्ति अटल है। राष्ट्र प्रथम हमारा संकल्प है। दुनिया की कोई ताकत भारत को झुका नहीं सकती। उन्होंने कहा, “आज प्रभास पाटन की पवित्र भूमि एक दिव्य आभा से परिपूर्ण है। महादेव का यह प्राकट्य, आसमान से हो रही पुष्पवर्षा, कला, संगीत और नृत्य की भव्य प्रस्तुतियां, वैदिक मंत्रों का उच्चारण और गर्भगृह में चल रहा शिव पंचाक्षरी का अखंड पाठ एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत कर रहे हैं।” पीएम मोदी जी ने इस दैवीय वातावरण में प्रकृति के जुड़ाव का भी जिक्र करते हुए कहा कि इन सबके साथ समंदर की लहरों की विजयी गर्जना सुनकर ऐसा प्रतीत होता है मानो पूरी सृष्टि एक साथ ‘जय सोमनाथ’ का उद्घोष कर रही है। सोमनाथ मंदिर के साथ अपने व्यक्तिगत जुड़ाव को साझा करते हुए, प्रधानमंत्री जी ने कहा, “दादा सोमनाथ के एक समर्पित भक्त के रूप में, मैं यहां कई बार आया हूं और अनगिनत बार उनके चरणों में शीश झुकाया है। लेकिन आज जब मैं यहां आ रहा था, तो समय की यह यात्रा मुझे एक बेहद सुखद और भावुक अनुभूति दे रही थी।” मंदिर के ऐतिहासिक संघर्ष और पुनर्निर्माण को याद करते हुए उन्होंने आगे कहा कि इसके पहले विनाश के इतने वर्षों बाद भी, हमें सोमनाथ के शाश्वत और अविनाशी होने पर गर्व है। पीएम मोदी जी ने वर्तमान मंदिर के निर्माण के 75 साल पूरे होने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “आज, जब हम सोमनाथ के इस आधुनिक स्वरूप की प्राण-प्रतिष्ठा के 75 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहे हैं, तो हम केवल दो समारोहों का हिस्सा नहीं बन रहे हैं। हम अपने साथ यह गौरव भी लेकर चल रहे हैं कि हजार साल बाद भी सोमनाथ शाश्वत और अविनाशी बना हुआ है।” उन्होंने आगे कहा कि जिसके नाम में ‘सोम’ (अमृत) है, उसे कौन नष्ट कर सकता है। इस मंदिर ने महमूद गजनवी, अलाउद्दीन खिलजी जैसे कई आक्रमणकारियों के हमले झेले, फिर भी अटूट रहा।

By UJAGAR

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