मिडिल ईस्‍ट में जारी उथल-पुथल ने पिछले तीन महीनों से भी ज्‍यादा समय से होर्मुज स्‍ट्रेट को दबाव में रखा हुआ है। यह दुनिया के सबसे व्यस्त एनर्जी कॉरिडोर में से एक है। इसमें रुकावट आने का असर कई देशों पर पड़ा है। लेकिन इस उथल-पुथल के बीच भारत ने शायद चुपके से ‘प्लान B’ ढूंढ लिया है। वह है – ओमान। थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, ओमान के साथ भारत का मुक्त व्यापार समझौता (FTA) उस समय व्यापार और ऊर्जा की सप्‍लाई को सुचारु बनाए रखने में मदद कर सकता है, जब खाड़ी क्षेत्र किसी मुश्किल दौर से गुजर रहा हो। यह समझौता 1 जून से लागू हो गया है। वैसे तो व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) से होने वाले व्यापारिक फायदे ओमान के अपेक्षाकृत छोटे बाजार के कारण शायद सीमित हों। लेकिन इस देश की भौगोलिक स्थिति भारत के लिए इसे मूल्यवान एंट्री गेट दे सकती है। खासकर तब जब खाड़ी क्षेत्र के पारंपरिक समुद्री शिपिंग मार्ग दबाव में आ जाएँ। ओमान की आबादी 55 लाख है। जीडीपी लगभग 110 अरब डॉलर है। यह भारत के सबसे बड़े एक्‍सपोर्ट डेस्टिनेशन में से एक नहीं है। हालांकि, खाड़ी क्षेत्र की कई अन्य अर्थव्यवस्थाओं के उलट ओमान के समुद्र तट का एक बड़ा हिस्सा अरब सागर और ओमान की खाड़ी के किनारे स्थित है। यह समुद्री पहुंच के लिए होर्मुज स्‍ट्रेट पर बहुत ज्‍यादा निर्भर है। जीटीआरआई ने कहा, ‘ओमान के साथ किया गया व्यापार समझौता भारत के लिए रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है। खाड़ी क्षेत्र के अन्य देशों के उलट मस्कट (ओमान) का ज्‍यादातर समुद्र तट होर्मुज स्ट्रेट के बाहर स्थित है। इस वजह से क्षेत्रीय संघर्षों, व्यवधानों या भू-राजनीतिक अस्थिरता के समय भी ओमान भारत के लिए व्यापार और ऊर्जा का विश्वसनीय एंट्री गेट बना रह सकता है।’ थिंक टैंक ने कहा कि इस समझौते को सिर्फ व्यापारिक नजरिए से ही नहीं, बल्कि भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में उठाए गए कदम के तौर पर भी देखा जाना चाहिए। जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने ओमान की भौगोलिक स्थिति के महत्व को समझाया। उन्‍होंने कहा कि सलालाह और दुक्म जैसे बंदरगाह उस समय भी सुलभ बने रहते हैं, जब होर्मुज स्ट्रेट से होने वाला आवागमन प्रभावित होता है। उन्‍होंने कहा, ‘ज्‍यादातर खाड़ी देश होर्मुज से शिपिंग पर निर्भर रहते हैं। इसके उलट ओमान का ज़्यादातर समुद्र तट इस स्ट्रैट के बाहर सीधे अरब सागर और ओमान की खाड़ी पर स्थित है। इससे सलालाह बंदरगाह और दुक्म बंदरगाह जैसे बड़े बंदरगाह तब भी चालू रहते हैं, जब होर्मुज से आने-जाने में रुकावट आती है।’ श्रीवास्‍तव ने कहा, ‘नतीजतन, खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष या अस्थिरता के समय भी ओमान एक भरोसेमंद ट्रेड और एनर्जी गेट के तौर पर काम करता रह सकता है।’ जीटीआरआई के अनुसार, हाल के व्यापारिक रुझानों ने इस फायदे को उजागर किया है। जैसे-जैसे खाड़ी की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ व्यापार कमजोर हुआ, उन देशों से भारत का आयात अप्रैल 2025 में लगभग 15 अरब डॉलर से घटकर अप्रैल 2026 में 9.8 अरब डॉलर रह गया। इस क्षेत्र का होने वाला निर्यात भी कम हुआ, जो 4.4 अरब डॉलर से गिरकर 2.7 अरब डॉलर पर आ गया। श्रीवास्‍तव ने कहा, ‘यह अनुभव दिखाता है कि जब होर्मुज स्‍ट्रेट जोखिम भरा या भीड़भाड़ वाला हो जाता है तो ओमान भारत के लिए भरोसेमंद वैकल्पिक व्यापार और ऊर्जा द्वार के तौर पर काम कर सकता है।’ अमेरिका-ईरान युद्ध ने होर्मुज स्‍ट्रेट से होने वाली शिपिंग में रुकावट डाल दी है। यह एक ऐसा रास्ता है जिससे दुनिया भर में रोजाना इस्तेमाल होने वाले तेल का लगभग पांचवां हिस्सा और समुद्री रास्ते से होने वाले कुल तेल व्यापार का एक-चौथाई हिस्सा गुजरता है। इस रुकावट ने सऊदी अरब, कतर और यूएई से भारत पहुंचने वाली एनर्जी सप्‍लाई पर असर डाला है। साथ ही कच्चे तेल की कीमतें भी बढ़ा दी हैं। इस समझौते के तहत, ओमान अपनी लगभग 98% टैरिफ लाइनों पर तुरंत शुल्क-मुक्त पहुंच देगा। इसमें भारत के कुल निर्यात का लगभग 99% मूल्य शामिल है। श्रीवास्तव ने कहा कि इससे भी ज्‍यादा 80% भारतीय उत्पाद पहले से ही लगभग 5% की औसत टैरिफ दरों पर ओमान में प्रवेश कर रहे थे। हालांकि, कुछ सामानों पर 100% तक की ड्यूटी लगी रही। उन्होंने कहा, ‘इन ड्यूटीज को हटाने से ओमान के बाजार में भारतीय सामानों की प्रतिस्पर्धा क्षमता में सुधार होने की उम्मीद है। हालांकि, देश की अपेक्षाकृत कम आबादी और बाजार के आकार के कारण एक्‍सपोर्ट ग्रोथ पर कुछ हद तक रोक लगना तय है।’ ओमान के लिए इस समझौते से भारत को ऊर्जा उत्पाद, उर्वरक और औद्योगिक कच्चा माल सप्लाई करने वाले देश के तौर पर उसकी मौजूदा भूमिका को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान ओमान से 7.2 अरब डॉलर का सामान आयात किया। इसमें कच्चे तेल का हिस्सा 1.6 अरब डॉलर, लिक्विफाइड नेचुरल गैस का 1.2 अरब डॉलर और उर्वरकों का 84.3 करोड़ डॉलर था। आयात में 46.5 करोड़ डॉलर का मेथनॉल और 42.4 करोड़ डॉलर का अमोनिया भी शामिल था। इसके बदले में भारत CEPA के तहत अपनी लगभग 78% टैरिफ लाइनों पर टैरिफ कम करेगा या हटा देगा। अजय श्रीवास्‍तव ने कहा, ‘इसलिए CEPA एक ऐसे रिश्ते को मजबूत करता है जो द्विपक्षीय व्यापार के विस्तार के साथ ऊर्जा और औद्योगिक इनपुट की भरोसेमंद सप्लाई सुनिश्चित करने के बारे में भी है।’ 18 दिसंबर, 2025 को इस समझौते पर साइन हुए थे। पिछले पांच सालों में यह लागू होने वाला भारत का पांचवां मुक्त व्यापार समझौता है। कुल मिलाकर यह 15वां ऐसा समझौता है।

By UJAGAR

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