Abhishek Banerjee ED Enquiry: टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी सोमवार को ED के दफ्तर पहुंचे थे। जहां उनसे करीब 11 घंटे पूछताछ की गई। जिसके बाद देर रात अभिषेक बनर्जी दफ्तर से बाहर निकले और मीडिया से बात की। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि वो जांच एजेंसी को पूरा सहयोग दे रहे हैं। आपको बता दें कि अभिषेक बनर्जी से कथित टीचर भर्ती घोटाले से जुड़े मामले में पूछताछ की गई। अभिषेक बनर्जी ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा 11 घंटे की लंबी पूछताछ के बाद कहा कि उन्होंने अपनी पूरी क्षमता से जवाब देने की कोशिश की है. उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले एक महीने से विपक्षी ताकतों को डराने-धमकाने की कोशिशें हो रही हैं, जैसे वोटर लिस्ट से नाम हटाना, काउंटिंग एजेंट को बाहर करना और चुनाव के बाद हिंसा भड़काना. ED के दफतर से बाहर निकलने पर अभिषेक बनर्जी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि कल मुझसे 8 से 8.30 घंटे और आज 11 घंटे पूछताछ की गई। यह 2023 का मामला है और मैं 10-12 बार एजेंसी के सामने पेश हो चुका हूं। मैं यह नहीं कहूँगा कि इस पर कोई राजनीतिक दबाव है या नहीं। भारतीय जनता पार्टी के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि बीजेपी के बारे में जितना कम कहा जाए, उतना ही अच्छा है। एक तरफ, वे हमारी पार्टी को तोड़ते हैं और चुनाव के बाद हिंसा करते हैं। अंत में उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर आप मेरा गला भी काट दें, तब भी मैं नहीं झुकूंगा। अगर एजेंसी मुझे भविष्य में भी बुलाएगी, तो मैं पेश होऊंगा। पूरी तरह से मैं जांच एजेंसी का सहयोग कर रहा हूं। पूछताछ के बाद अभिषेक बनर्जी ने राजनीतिक बदले की भावना और पार्टी को तोड़ने की कोशिशों का आरोप लगाया. अभिषेक बनर्जी ने कहा कि केंद्रीय एजेंसियों के डर से पार्टी को तोड़ने या सांसदों और विधायकों को तोड़ने की कोशिश करने से कोई फायदा नहीं होगा. उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी को डराया-धमकाया नहीं जा सकता. इसके अलावा अभिषेक ने बताया, जब भी उन्हें बुलाया गया, वे पेश हुए. CBI की जांच 2022 में शुरू हुई थी, जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया था उन्हें जमानत मिल चुकी है, फिर भी कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है. बता दें कि इससे पहले रविवार को सीआईडी ने अभिषेक बनर्जी से आठ घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की. पश्चिम बंगाल सीआईडी ने कोलकाता में अभिषेक बनर्जी और पार्टी विधायक कुणाल घोष से लंबी पूछताछ की थी. यह कार्रवाई विधानसभा में विपक्ष के नेता की नियुक्ति से जुड़े दस्तावेजों पर विधायकों के हस्ताक्षरों में कथित हेराफेरी की जांच के तहत की गई. पूछताछ के बाद सीआईडी कार्यालय से बाहर आए कुणाल घोष ने बताया कि जांच अधिकारियों ने उनसे और अभिषेक बनर्जी से आमने-सामने बैठाकर सवाल-जवाब किए. घोष ने कहा, “मैंने जांच अधिकारियों के सभी सवालों के जवाब दिए हैं और जांच में पूरा सहयोग किया है. पश्चिम बंगाल के चर्चित प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाले में ईडी कथित मनी लॉन्ड्रिंग, वित्तीय लेन-देन और भर्ती प्रक्रिया में सामने आई अनियमितताओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जांच कर रही है। यह मामला पश्चिम बंगाल में प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार से जुड़ा है। आरोप है कि भर्ती के दौरान निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया और कई ऐसे अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी गई, जो पात्रता मानकों पर खरे नहीं उतरते थे, कम अंक प्राप्त करने वाले थे या जिनका नाम मेरिट लिस्ट में शामिल ही नहीं था। जांच एजेंसियों के अनुसार, नौकरी दिलाने के नाम पर कथित तौर पर एक संगठित नेटवर्क सक्रिय था, जिसके माध्यम से धन लेकर नियुक्तियां कराई गईं। आरोप है कि इस प्रक्रिया में योग्य उम्मीदवारों की अनदेखी कर पैसे देने वालों को लाभ पहुंचाया गया। ED ने वर्ष 2022 में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत इस मामले की जांच शुरू की थी। एजेंसी की कार्रवाई की शुरुआत केंद्रीय जांच ब्यूरो की उस एफआईआर से हुई, जो उसी साल कोलकाता हाई कोर्ट के निर्देश पर दर्ज की गई थी। CBI और ED दोनों इस बात की जांच कर रही हैं कि कथित भर्ती घोटाले से अर्जित धन का इस्तेमाल कहां और कैसे किया गया, यह किन-किन लोगों तक पहुंचा और उसे छिपाने या अन्य माध्यमों में निवेश करने के लिए क्या कदम उठाए गए।
