तृणमूल कांग्रेस की ओर से लोकसभा के बागी 20 सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग के बीच पार्टी से बगावत कर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया यानि एनसीपीआई में शामिल हुए इन सांसदों के विलय-अयोग्यता का फैसला मानसून सत्र से पहले होगा। लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी ने शुक्रवार को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात कर सभी बागी सांसदों को दल बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य ठहराने की मांग करते हुए 20 अलग-अलग याचिकाएं सौंपी। बागी सांसदों के प्रतिनिधिमंडल से स्पीकर पहले ही मिल चुके हैं। बागी सांसदों के एनसीपीआई में विलय के प्रस्ताव के खिलाफ 14 जून को तृणमूल कांग्रेस की ओर से दी गई चिठठी के सिलसिले में स्पीकर ने पार्टी नेताओं को अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया था। लोकसभा में तृणमूल संसदीय दल के नेता अभिषेक बनर्जी के साथ कल्याण बनर्जी, महुआ मोइत्रा और राज्यसभा में पार्टी के नेता डेरेक ओब्रायन के साथ पार्टी नेताओं का यह प्रतिनिधिमंडल बिरला से मिला। स्पीकर से मुलाकात के बाद अभिषेक बनर्जी ने पत्रकारों से कहा कि 20 लोगों ने स्पीकर से मुलाकात कर एक अलग समूह मानने की बात कही मगर बाद में पता चला कि वे एक अनजान एनसीपीआई में शामिल होने का दावा कर रहे। आश्चर्य यह है कि बागवत करने वालों ने भी इस पार्टी का नाम नहीं सुना था। उन्होंने कहा कि बागियों ने संविधान की 10वीं अनुसूची का उल्लंघन किया है और यदि वे जिस चुनाव चिह्न पर चुने गए हैं उसके दो साल बाद ही एक नई पार्टी में शामिल हो रहे हैं तो उनकी सदस्यता खत्म होनी चाहिए। दो-तिहाई सदस्यों के किसी दूसरी पार्टी में विलय का नियम पूरी पार्टी पर लागू होता है और न कि केवल संसदीय दल पर। बनर्जी ने इसी आधार पर सभी 20 बागियों के खिलाफ अलग-अलग याचिका स्पीकर को सौंपते हुए सदस्यता रद्द करने की मांग की है। वहीं, सूत्रों के अनुसार, स्पीकर ने कहा कि इसमें कई कानूनी पहलु जुड़े हैं और इसलिए सभी पक्षों को सुनने के बाद ही सदस्यों की सदन में स्थिति को लेकर फैसला लिया जाएगा।

By UJAGAR

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