देशभर में पेपर लीक मामलों पर बढ़ते विवाद के बीच मोदी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में पेपर लीक संशोधन बिल को मंजूरी दे दी गई। सूत्रों के मुताबिक, संगठित तरीके से पेपर लीक कराने वालों के लिए 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। सरकार इस बिल को 27 जुलाई को संसद में पेश कर सकती है। सूत्रों के अनुसार, नए संशोधन बिल में पेपर लीक को संगठित अपराध (Organised Crime) की श्रेणी में रखते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त सजा का प्रावधान किया गया है। इसके तहत मास्टरमाइंड, गिरोह और नेटवर्क चलाने वालों पर 10 साल तक की कैद और 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। कैबिनेट की मंजूरी से एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देर रात वीडियो संदेश जारी कर कहा था कि सरकार पेपर लीक के खिलाफ कठोर कानून लाएगी। उन्होंने कहा कि लाखों छात्रों और उनके परिवारों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। प्रधानमंत्री ने बताया कि सरकार ने पिछले ढाई महीनों में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है और 22 लाख छात्रों की परीक्षा दोबारा कराकर समय पर परिणाम भी घोषित किए हैं। सूत्रों के मुताबिक, कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद सरकार इस संशोधन विधेयक को 27 जुलाई को संसद में पेश कर सकती है। संसद से पारित होने के बाद यह देश में परीक्षा से जुड़े अपराधों के खिलाफ सबसे सख्त कानूनों में शामिल होगा। प्रधानमंत्री के वीडियो संदेश के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों की सबसे बड़ी मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। उन्होंने सरकार से छात्रों से माफी मांगने और प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई करने वालों के खिलाफ कदम उठाने की मांग दोहराई। वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने भी कहा कि सरकार की सबसे सख्त कार्रवाई धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाना होगी। यह पूरा विवाद NEET-UG पेपर लीक मामले के बाद शुरू हुआ। दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का आंदोलन जारी है। मामले की जांच CBI कर रही है और अब तक कई राज्यों से 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच एजेंसी जल्द ही चार्जशीट दाखिल कर सकती है।

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