बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर ने बड़ी जीत हासिल की. 32वें राउंड की मतगणना पूरी होने के बाद उन्हें कुल 64,151 वोट मिले. भाजपा के उम्मीदवार नीरज सिन्हा को 44,827 वोट मिले, जबकि राजद की रेखा गुप्ता 14,273 वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहीं. प्रशांत किशोर ने 19,324 मतों के अंतर से जीत दर्ज की. जीत के बाद उन्होंने इसे बांकीपुर की जनता की जीत बताया. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में कोई भी राजनीतिक गढ़ हमेशा कायम नहीं रहता और जनता समय आने पर बदलाव का फैसला करती है. साथ ही, उन्होंने भाजपा और उसके बिहार नेतृत्व पर हमला बोलते हुए कहा कि राज्य की जनता मौजूदा नेतृत्व से संतुष्ट नहीं है और यही चुनाव परिणाम में भी साफ दिखाई दिया. बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव का परिणाम एक इतिहास लेकर आया है। यह इतिहास विधानसभा में एक नए पार्टी के उद्भव के साथ तो आया ही है, पर इसके साथ ही इस चुनाव परिणाम ने बीजेपी से इतर सोचने का प्लेटफार्म भी उपलब्ध कराया है। इतिहास तो राष्ट्रीय जनता दल का उस भूल का भा बनेगा, जो उसने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को हल्के ढंग से देखने का काम किया। चलिए समझते हैं कि इस चुनाव परिणाम ने बीजेपी को डैमेज किया या फिर राष्ट्रीय जनता दल को? विधायकों की संख्या के स्तर पर देखें तो बीजेपी को यह एक विधायक का लॉस दिखता है। पर बात यहीं तक सीमित नहीं है। बात तो यहां तक चली गई जब बीजेपी का गढ़ ध्वस्त हो सकता है, जहां कई दशक से बीजेपी के उम्मीदवार का परचम लहरा रहा था, उसका डंडा झंडा दोनों ही उखड़ गया। पर एक बात तो है कि बीजेपी के पास आत्ममंथन का समय है कि कहां गलतियां हुईं? उन गलतियों को कैसे सुधारा जाए? संभवतः हार पर बीजेपी का मंथन भी शुरू हो जाए। पर बीजेपी के लिए इस तरह की हार का मौका अब 2030 के विधानसभा चुनाव में आएगा। और इसके लिए एक लंबा समय मिल जाएगा। पूरे चुनाव का आकलन करें तो इस चुनाव में केवल बीजेपी ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय जनता दल भी ओवर कॉन्फिडेंस के ‘रथ’ पर सवार रही। राजद को यह लग रहा था कि अभी तक वोट बीजेपी को हराने और राजद को हराने के चिंतन के साथ ही होता है। और इसमें कोई अमूलचूल परिवर्तन होने वाला नहीं है। पर इस चुनाव में हुआ कुछ ऐसा कि प्रशांत किशोर ने बाजी ही पलट दी। प्रशांत किशोर ने धीरे-धीरे यह एजेंडा सेट कर डाला कि यह चुनाव उनके लिए मौका है जो न तो राजद को वोट देना चाहते है और न राजद के आने के डर से बीजेपी को। प्रशांत किशोर ने बीजेपी और राजद माइनस एक पार्टी के रूप में खुद को प्राेजेक्ट किया और सीधे बदलाव की बात की। पीके ने सीधे-सीधे व्यवस्था परिवर्तन की बात की। यही वजह भी है कि प्रशांत किशोर को वोट देने वालों में सभी वर्ग, जाति और धर्म के लोग दिखे। हर बूथ पर प्रशांत किशोर को अच्छा वोट मिला। प्रशांत किशोर के लिए सबसे बड़ी बात यह हुई कि तेजस्वी यादव ने जैसे ही बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के प्रति कोई इंटरेस्ट नहीं दिखाया, मुस्लिम और यादव का वोट प्रशांत किशोर की झोली में जाता दिखा। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस कहीं नहीं दिखी। राजद की उम्मीदवारी के प्रति अनभिज्ञता दिखाई दी। और एक तरह से महागठबंधन के बीच राजद की दबंगता को भी दर्शाया। सबसे बड़ी बात तो यह हुई कि राहुल गांधी ने प्रशांत किशोर के चुनाव लड़ने का समर्थन किया। इन स्थितियों ने भी राज्य में एक नए समीकरण को जन्म दे डाला। इस चुनाव परिणाम को देख कर लगता है कि यहां से एक इतिहास और न बन जाए कि माइनस बीजेपी और माइनस राजद एक गठबंधन तैयार हो, जो इन दोनों से सामान रूप से दूरी रख कर राजनीत की एक नई मिसाल पेश करे।
