केंद्र सरकार ने शुक्रवार को टेलीविजन पर दिखाए जाने वाले विज्ञापनों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने हर घंटे टीवी पर अधिकतम 12 मिनट विज्ञापन दिखाने की सीमा को खत्म कर दिया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि अब प्रसारक अपनी जरूरत के हिसाब से जितने चाहें, उतने विज्ञापन दिखा सकते हैं। यह नियम साल 2006 में केबल टेलीविजन नेटवर्क नियम, 1994 के तहत लागू किया गया था। इसका मकसद दर्शकों को लगातार और लंबे विज्ञापन ब्रेक से बचाना था। मंत्रालय ने कहा कि तब से टीवी प्रसारण के क्षेत्र में काफी बदलाव आया है। साल 2006 में देश में केवल 62 टीवी चैनल थे, जबकि अब इनकी संख्या 900 से ज्यादा हो चुकी है। इस फैसले का सीधा असर टीवी देखने वाले लोगों पर पड़ सकता है। अब चैनलों पर हर घंटे केवल 12 मिनट विज्ञापन दिखाने की कानूनी सीमा नहीं होगी। इसका मतलब है कि दर्शकों को पहले के मुकाबले लंबे विज्ञापन ब्रेक देखने पड़ सकते हैं। खासकर प्राइम टाइम के कार्यक्रमों, लाइव खेलों और बड़ी फिल्मों के प्रसारण के दौरान विज्ञापन ब्रेक ज्यादा लंबे हो सकते हैं। भारत में टीवी चैनल विज्ञापनों से होने वाली कमाई पर काफी हद तक निर्भर रहते हैं। सरकार का यह फैसला सभी टीवी नेटवर्क पर लागू होगा। यानी अगर आप डीटीएच के जरिए किसी पेड चैनल का भुगतान करके उसे देखते हैं, तब भी वहां लंबे विज्ञापन ब्रेक देखने को मिल सकते हैं। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का कहना है कि आज का टीवी क्षेत्र साल 2006 के मुकाबले पूरी तरह बदल चुका है। इसलिए विज्ञापनों की सीमा तय करने वाला पुराना नियम अब पहले की तरह जरूरी नहीं रह गया है। जब यह नियम लागू किया गया था, तब भारत में एनालॉग केबल टीवी का दौर था और चैनलों की संख्या भी बहुत कम थी। उस समय दर्शकों के पास मनोरंजन के विकल्प सीमित थे। मंत्रालय के अनुसार, अब केबल टीवी क्षेत्र का पूरी तरह डिजिटलीकरण हो चुका है। डीटीएच, केबल टीवी, एचआईटीएस और आईपीटीवी जैसे सभी टीवी वितरण प्लेटफॉर्म डिजिटल हो चुके हैं। आज दर्शकों के पास 900 से ज्यादा टीवी चैनल मौजूद हैं। सरकार का मानना है कि इतने ज्यादा चैनल होने के कारण टीवी बाजार में पर्याप्त प्रतिस्पर्धा है। अगर किसी चैनल पर बहुत ज्यादा विज्ञापन दिखाए जाते हैं, तो दर्शक दूसरे चैनल पर जा सकते हैं। सरकार के अनुसार, इस फैसले का एक बड़ा कारण पारंपरिक टीवी चैनलों और डिजिटल मीडिया के बीच प्रतिस्पर्धा को बराबर करना भी है। मंत्रालय ने कहा कि डिजिटल मीडिया पर विज्ञापन दिखाने की ऐसी कोई तय सीमा नहीं है। वहीं पारंपरिक टीवी चैनलों पर विज्ञापनों की अवधि को लेकर नियम लागू था। ऐसे में टीवी चैनलों को डिजिटल प्लेटफॉर्म के मुकाबले नुकसान हो रहा था। अब विज्ञापन की समय सीमा हटाकर सरकार पारंपरिक टीवी चैनलों को डिजिटल मीडिया के साथ बेहतर तरीके से प्रतिस्पर्धा करने का मौका देना चाहती है। सरकार का कहना है कि टीवी उद्योग और डिजिटल मीडिया, दोनों के बीच पर्याप्त प्रतिस्पर्धा मौजूद है। विज्ञापन की सीमा हटाने से टीवी चैनलों को कारोबार करने में आसानी होगी और वे विज्ञापन से ज्यादा कमाई कर सकेंगे।
