प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को नई दिल्ली स्थित सुषमा स्वराज भवन में आयोजित जल शक्ति मंत्रालय के दो दिवसीय विभागीय शिखर सम्मेलन के समापन सत्र में शामिल होंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री सम्मेलन को संबोधित भी करेंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की ओर से जारी विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गई है। यह अपनी तरह का पहला विभागीय शिखर सम्मेलन है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना पर केंद्रित बताया गया है। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल के जरिए जल क्षेत्र से जुड़ी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं पर तेजी से काम करना है। PMO के अनुसार, सम्मेलन का उद्देश्य ‘टीम इंडिया’ की भावना को मजबूत करना, सहकारी संघवाद को और गहरा करना तथा केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। इसके जरिए राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। सम्मेलन में केंद्र और राज्य सरकारों के राजनीतिक नेतृत्व के साथ वरिष्ठ अधिकारी भी हिस्सा ले रहे हैं। इस दौरान जल क्षेत्र से जुड़ी योजनाओं और परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर राज्यों के अनुभवों पर चर्चा की जा रही है। सम्मेलन के पहले दिन जल क्षेत्र से जुड़ी प्रमुख प्राथमिकताओं पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। इसमें अलग-अलग राज्यों की बेहतर कार्यप्रणालियों को साझा करने के साथ-साथ योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों का समाधान तलाशने पर जोर दिया गया। बैठक में योजनाओं को तय समयसीमा में पूरा करने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने पर भी चर्चा हुई। सरकार का फोकस जल क्षेत्र में चल रही परियोजनाओं को सिर्फ मंजूरी देने के बजाय उनके जमीनी क्रियान्वयन और परिणामों को बेहतर बनाने पर है। सम्मेलन में चार प्रमुख क्षेत्रों को विशेष रूप से चर्चा के केंद्र में रखा गया है।

  •     जल बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का समय पर क्रियान्वयन
  •     ‘जल संचय जन भागीदारी- कैच द रेन’ अभियान में जनभागीदारी बढ़ाना
  •     पेयजल प्रणालियों के स्रोतों की निरंतरता सुनिश्चित करना
  •     जल जीवन मिशन 2.0 के तहत ग्रामीण पेयजल योजनाओं का संचालन और रखरखाव

इन विषयों पर केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय बढ़ाने तथा व्यावहारिक समाधान तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। विचार-विमर्श का एक बड़ा उद्देश्य देश में जल अवसंरचना से जुड़ी परियोजनाओं को तेजी देना है। इसके साथ ही जल संरक्षण में आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने और पेयजल स्रोतों की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने पर भी फोकस किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल सेवाओं को अधिक विश्वसनीय बनाने और योजनाओं के संचालन एवं रखरखाव की व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भी ठोस कदम तय किए जाने हैं। दो दिवसीय सम्मेलन के समापन सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भागीदारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री इस अवसर पर जल क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों और राज्यों के प्रतिनिधियों को संबोधित करेंगे। सरकार की कोशिश है कि केंद्र और राज्य मिलकर जल संरक्षण, पेयजल आपूर्ति और जल अवसंरचना से जुड़ी चुनौतियों का समाधान निकालें और तय योजनाओं को समयबद्ध तरीके से जमीन पर उतारा जाए।

By UJAGAR

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *