पटना जिले का बाढ़ अनुमंडल इस समय गंगा नदी के विकराल और भयानक रूप का सामना कर रहा है. शनिवार का दिन पूरे इलाके के लिए बेहद भारी और खतरनाक साबित हुआ. उफान मारती गंगा नदी का पानी अब राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) को पार कर सीधे रिहाइशी इलाकों, गांवों और लोगों के घरों में तबाही मचा रहा है. शनिवार को बख्तियारपुर में गंगा नदी का जलस्तर इतनी तेजी से बढ़ा कि पानी कई जगहों पर NH- 31 को लांघते हुए सीधे गांवों और घरों में प्रवेश कर गया. इसके बाद मोकामा प्रखंड के बरहपुर और शिवनार इलाके में भी स्थिति बेकाबू हो गई, जहां NH 31 को पार कर पानी आबादी वाले इलाकों में फैल गया. तबाही का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका. शनिवार देर रात करीब 12 बजे के बाद हाथीदह में रेलवे स्टेशन के पास गंगा का पानी NH- 80 को पार कर गांवों में घुस गया. हाईवे पर पानी चढ़ने और गांवों के जलमग्न होने से रविवार को स्थिति और भी भयावह होने की गंभीर आशंका जताई जा रही है. गंगा का पानी अब केवल निचले इलाकों तक सीमित नहीं है, बल्कि शहरी और घने आवासीय क्षेत्रों में प्रवेश कर चुका है. घरों में पानी घुस जाने से लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. चारों तरफ सिर्फ जलप्रलय जैसा नजारा है, जिससे स्थानीय निवासियों के बीच डर और दहशत का माहौल बना हुआ है. दूसरी ओर, जिला व स्थानीय प्रशासन बाढ़ पीड़ितों की मदद का दावा तो कर रहा है, लेकिन धरातल पर ये इंतजाम बेहद नाकाफी साबित हो रहे हैं. प्रशासन की ओर से केवल प्रखंड मुख्यालय में कम्युनिटी किचन (सामुदायिक रसोई) चलाया जा रहा है, साथ ही बहुत कम मात्रा में सूखा राशन और कुछ प्लास्टिक शीट का वितरण किया गया है. प्रशासन की इस ‘खानापूर्ति’ से प्रभावित लोगों के बीच भारी असंतोष और आक्रोश व्याप्त है. ग्रामीणों का स्पष्ट रूप से मानना है कि अब स्थिति सिर्फ इंतजार करने की नहीं, बल्कि ठोस और बेहतर इंतजाम करने की है. तबाही झेल रहे ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ प्रखंड मुख्यालय में खाना देने से हर पीड़ित तक मदद नहीं पहुंच सकती. सरकार और प्रशासन को तुरंत कदम उठाते हुए हर गांव के सरकारी भवनों (स्कूल, पंचायत भवन आदि) में बाढ़ पीड़ितों के ठहरने और भोजन-पानी की समुचित व्यवस्था करनी चाहिए ताकि इस प्राकृतिक आपदा में लोगों को राहत मिल सके.
