दार्जिलिंग के ताकदा कैंटोनमेंट अस्पताल परिसर में शुक्रवार तड़के सुबह अचानक भूस्खलन होने से हड़कंप मच गया। यह घटना सुबह करीब साढ़े 3 बजे की बताई जा रही है। भूस्खलन अस्पताल के एक हिस्से में हुआ, जिसके बाद वहां मौजूद मरीजों और उनके परिजनों में अफरा-तफरी मच गई। घटना के समय अस्पताल के अंदर कुल छह लोग मौजूद थे।इसी दौरान एक मरीज का केयरटेकर मलबे की चपेट में आकर उसके नीचे दब गया। अचानक हुए इस हादसे से अस्पताल परिसर में कुछ देर के लिए डर का माहौल बन गया। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय स्तर पर राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया। भूस्खलन के बाद एक मरीज का केयरटेकर मलबे के नीचे फंस गया था। हादसे के तुरंत बाद स्थानीय बचाव दल ने मलबा हटाने का काम शुरू किया। बचावकर्मियों ने काफी सावधानी से मलबे को हटाकर अंदर फंसे व्यक्ति तक पहुंचने की कोशिश की। काफी देर की मशक्कत के बाद केयरटेकर को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। सबसे राहत की बात यह रही कि उसे जीवित अवस्था में बाहर निकाला गया। इसके बाद उसे इलाज के लिए दार्जिलिंग अस्पताल ले जाया गया। हालांकि, उसकी मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति को लेकर अभी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। हादसे के समय अस्पताल के अंदर मौजूद बाकी पाँच लोग भी भूस्खलन की चपेट में आ सकते थे। हालांकि, उन्होंने किसी तरह वहां से बाहर निकलकर अपनी जान बचाई। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इन पांच लोगों में से किसी को भी चोट नहीं लगी है। हादसे के बाद सभी को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। भूस्खलन के कारण कुछ समय के लिए अस्पताल परिसर में डर और तनाव का माहौल रहा। बचाव अभियान के दौरान अस्पताल परिसर में लोगों की आवाजाही पर भी नजर रखी गई। फिलहाल हादसे में किसी अन्य व्यक्ति के घायल होने की सूचना नहीं है। ताकदा ग्रामीण अस्पताल रंगली-रंगलीओट ब्लॉक के प्रमुख सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में शामिल है। यह अस्पताल पहाड़ी क्षेत्र में रहने वाले बड़ी संख्या में लोगों के लिए इलाज का महत्वपूर्ण केंद्र है। दार्जिलिंग शहर से यह अस्पताल करीब 28 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। दूरदराज के इलाकों से लोग इलाज और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के लिए यहां पहुंचते हैं। ऐसे में अस्पताल परिसर में भूस्खलन की घटना ने सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों के लिए अस्पताल तक पहुंचना और वहां सुरक्षित इलाज मिलना काफी महत्वपूर्ण है। अब प्रशासन की प्राथमिकता अस्पताल परिसर को सुरक्षित बनाना और किसी भी संभावित खतरे का आकलन करना है। भूस्खलन के बाद अस्पताल की इमारत और आसपास के हिस्से की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि अस्पताल के भवन को कितना नुकसान पहुंचा है।इसके अलावा, इमारत का कोई अन्य हिस्सा भूस्खलन के कारण कमजोर हुआ है या नहीं, इसकी भी जांच की जानी है। प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की ओर से मौके का निरीक्षण किए जाने की उम्मीद है। अस्पताल परिसर में आगे किसी तरह की दुर्घटना न हो, इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है। खासकर पहाड़ी क्षेत्र में मिट्टी खिसकने की आशंका को देखते हुए अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है। घटना के बाद स्थानीय लोगों की नजर अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। दार्जिलिंग के पहाड़ी इलाकों में बारिश के दौरान भूस्खलन का खतरा बना रहता है। ताकदा अस्पताल में हुई इस घटना के बाद आसपास के इलाकों में भी चिंता बढ़ गई है। अगर बारिश लगातार जारी रहती है, तो नए सिरे से भूस्खलन की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में संवेदनशील पहाड़ी इलाकों की निगरानी बढ़ाना जरूरी हो सकता है। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्र की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। स्थानीय लोगों को भी संभावित खतरे वाले इलाकों से सावधान रहने की जरूरत है। फिलहाल जिला प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन की ओर से घटना को लेकर विस्तृत जानकारी का इंतजार है।

    By UJAGAR

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