कैमैक स्ट्रीट बिलबोर्ड विवाद: पेशी से पहले अभिषेक बनर्जी का पुलिस को ईमेल, कोलकाता के कैमैक स्ट्रीट स्थित तृणमूल कांग्रेस (TMC) के दफ्तर से बिलबोर्ड हटाने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कानूनी दांव-पेच में बदल चुका है। मामले में शेक्सपियर सरणी पुलिस थाने द्वारा मंगलवार को पूछताछ के लिए तलब किए जाने से ठीक पहले, डायमंड हार्बर से टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने कोलकाता पुलिस को एक ईमेल भेजकर कानूनी व प्रक्रियात्मक खामियों पर सवाल उठाए हैं। वहीं दूसरी ओर, पुलिस ने इन आरोपों का खंडन करते हुए दावा किया है कि FIR की प्रति समय पर आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई थी। अभिषेक बनर्जी के वकील अर्क नाग के अनुसार, पुलिस ने इस मामले में नोटिस तो जारी किया, लेकिन संबंधित FIR या नोटिस की कोई भी प्रति कोलकाता पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं कराई गई। सांसद की ओर से भेजे गए ईमेल में इसे गंभीर कानूनी लापरवाही और नियमों का बार-बार उल्लंघन बताया गया है। हालांकि, कोलकाता पुलिस ने जवाब में वेबसाइट पर अपलोड किए गए दस्तावेजों के साक्ष्य प्रस्तुत करते हुए इन दावों को खारिज कर दिया है। मंगलवार को तय समय पर सांसद खुद थाने में उपस्थित होंगे या नहीं, इस पर स्थिति स्पष्ट नहीं है। विवाद की शुरुआत 27 अगस्त (गुरुवार) की शाम को हुई, जब कोलकाता नगर निगम (KMC) के कर्मचारी और पुलिस अधिकारी गैस कटर व अन्य उपकरणों के साथ कैमैक स्ट्रीट स्थित टीएमसी कार्यालय पहुंचे। अधिकारियों का कहना था कि दफ्तर के बाहर लगा बिलबोर्ड गैरकानूनी है और इसे तुरंत हटाया जाना चाहिए। सूचना मिलते ही खुद सांसद अभिषेक बनर्जी बाहर आए और कार्रवाई से संबंधित आधिकारिक और वैध सरकारी आदेश की कॉपी मांगी। आरोप है कि मौके पर मौजूद अधिकारी कोई दस्तावेज नहीं दिखा सके, जिससे दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। घटना के दौरान अभिषेक बनर्जी ने नगर निगम और पुलिस की मंशा पर कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि उनके कार्यालय के बाहर किस तरह का बोर्ड लगाया जाएगा, यह नगर निगम तय नहीं कर सकता। इसके साथ ही उन्होंने पुलिस की ‘अति-सक्रियता’ की आलोचना करते हुए नगर निगम के कर्मचारियों की बिना वैध कागजात उपस्थिति को गैरकानूनी करार दिया। इसी मामले में सोमवार को टीएमसी के वरिष्ठ सांसद डेरेक ओ’ब्रायन को भी शेक्सपियर सरणी थाने में उपस्थित होने के लिए समन भेजा गया था। हालांकि, उन्होंने निर्धारित दिन पेश होने से परहेज किया और कानूनी परामर्श का हवाला देते हुए 7 दिनों का अतिरिक्त समय मांगा। डेरेक ओ’ब्रायन का तर्क है कि उन्हें नोटिस काफी देर से मिला, जिसके कारण वे समय पर अपने वकील से सलाह नहीं ले सके।

By UJAGAR

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