पूरी दुनिया में आतंकवाद की फैक्ट्री और आतंकियों की सबसे बड़ी पनाहगाह के रूप में कुख्यात पाकिस्तान ने उल्टे भारत पर आतंकवाद फैलाने का आरोप लगाया है। पाकिस्तान के परमाणु हथियारों से जुड़े एक वरिष्ठ सलाहकार ने कहा है कि भारत पाकिस्तान के अंदर TTP (तहरीक-ए-तालिबान) और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) जैसे समूहों का समर्थन कर रहा है। पाकिस्तान की नेशनल कमांड अथॉरिटी (NCA) के सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ट) मजहर जमील का कहना है कि पाकिस्तान में अस्थिरता पैदा करने के लिए भारत डोभाल सिद्धांत (Doval Doctrine) लागू कर रहा है। पाकिस्तानी सलाहकार ने यह बात 13 अक्टूबर को लंदन में इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (IISS) में बोलते हुए कही। जमील ने भारत पर आतंकवाद को समर्थन देने का आरोप लगाया और इसके समर्थन में 1971 में तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में मुक्तिवाहिनी और 1980 के दशक में LTTE को समर्थन देने की बात कही। पाकिस्तानी प्रोपेगैंडा और झूठ से भरे अपने भाषण में जमील ने यहां तक कह दिया कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दोहरी क्षमता वाली ब्रह्मोस मिसाइलों का इस्तेमाल किया। दोहरी क्षमता से मतलब है कि ये मिसाइलें परमाणु और पारंपरिक दोनों तरह के हथियार ले जा सकती हैं। हालांकि, उनका यह दावा पूरी तरह झूठ है, क्योंकि ब्रह्मोस मिसाइलें केवल पारंपरिक हथियार ले जा सकती हैं। ये भारत की स्ट्रैटेजिक कमांड फोर्स का हिस्सा नहीं हं। मजहर जमील 2015 से 2017 तक पाकिस्तान की सेना की परमाणु हथियारों को संभालने वाली इकाई स्ट्रैटेजिक प्लान्स डिवीजन के महानिदेशक थे। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने दक्षिण एशिया को परमाणु तबाही के कगार पर पहुंचा दिया था और स्थिति संभालने का पूरा क्रेडिट पाकिस्तान को दे दिया। पाकिस्तान के परमाणु सलाहकार ने सलाहकार ने स्वीडिश थिंक टैंकर SIPRI के हालिया आकलन का हवाला दिया जिसमें कहा गया है कि भारत परमाणु पनडुब्बी से लॉन्च होने वाली मिसाइलों को तैनात करके फर्स्ट स्ट्राइक क्षमता की ओर बढ़ रहा है। फर्स्ट स्ट्राइक क्षमता उसे कहते हैं, जब देश पहले परमाणु हमला करने के लिए तैयार होता है। जमील ने दावा किया कि भारत ने कुछ परमाणु वॉरहेट को पनडुब्बी से लॉन्च होने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ जोड़ दिया है। भारत ने अपने परमाणु सिद्धांत में परमाणु हथियारों के पहले इस्तेमाल न करने की नीति अपनाई है। इसी सप्ताह UNGA में परमाणु मामलों पर फर्स्ट कमेटी की बैठक में भारत ने विश्वसनीय न्यूनतम परमाणु निवारक की नीति दोहराई और कहा कि परमाणु हथियारों पर उसकी नीति पहले इस्तेमाल न करने (No First Use) की है। लेकिन जमीन ने भारत की नो फर्स्ट यूज पॉलिसी को एक राजनयिक चाल कहा, जिसका मकसद सिर्फ वाहवाही बटोरना है। जमील ने दावा किया कि भारत के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन ने रिकॉर्ड पर कहा था कि भारत की परमाणु नीति इतनी लचीली है कि इसमें फर्स्ट स्ट्राइक के विकल्प शामिल हो सकते हैं। शिवशंकर मेनन को भारत की परमाणु नीति का सूत्रधार माना जाता है। हालांकि, मेनन ने भारत की परमाणु नीति का ड्राफ्ट नहीं बनाया था, लेकिन 2017 में अपनी एक किताब में उन्होंने फर्स्ट स्ट्राइक के विकल्प पर चर्चा की थी। यहां ध्यान देने वाली बात है कि मेनन ने फर्स्ट स्ट्राइक शब्द का इस्तेमाल किया था, जबकि भारत नीति नो फर्स्ट यूज की है। दोनों बिल्कुल अलग-अलग चीजें हैं।

By UJAGAR

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