पश्चिम बंगाल के भांगड़ क्षेत्र के प्रमुख राजनीतिक चेहरे अराबुल इस्लाम ने इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) से इस्तीफा दे दिया है। 2026 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) छोड़कर ISF में शामिल हुए अराबुल ने महज कुछ ही महीनों के भीतर पार्टी का साथ छोड़ दिया है। सोशल मीडिया पर खुद इस फैसले का ऐलान करते हुए उन्होंने ISF के शीर्ष नेतृत्व पर ‘तानाशाही’ चलाने और पार्टी कैडर पर इलाके की जनता पर अत्याचार करने का बड़ा आरोप लगाया है। अराबुल इस्लाम ने सोशल मीडिया पर अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए लिखा, “मैं आईएसएफ की तानाशाही और एकतंत्र की कड़े शब्दों में निंदा करता हूं। आईएसएफ की उपद्रवी वाहिनी द्वारा भांगड़ में जिस तरह से आम लोगों पर अत्याचार और अन्याय किया जा रहा है, उसके विरोध में मैंने पार्टी और अपने पद से इस्तीफा देने का फैसला किया है।” उनके इस बयान के बाद स्थानीय राजनीति में हड़कंप मच गया है। अराबुल इस्लाम 2006 में तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर भांगड़ से विधायक बने थे। हालांकि, समय के साथ पार्टी के भीतर कैनिंग पूर्व के टीएमसी नेता सौकत मोल्ला के साथ उनकी खींचतान बढ़ती चली गई। टीएमसी में खुद को दरकिनार किए जाने का दावा करते हुए उन्होंने चुनाव से पहले तृणमूल छोड़कर नौशाद सिद्दीकी की पार्टी आईएसएफ जॉइन कर ली थी। लेकिन अब आईएसएफ से भी मोहभंग होने के बाद उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर कयासों का दौर शुरू हो गया है। आईएसएफ छोड़ने के बाद अराबुल इस्लाम की भावी राजनीतिक यात्रा को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहा है कि क्या वह दोबारा तृणमूल कांग्रेस का रुख करेंगे या राजनीति से संन्यास लेंगे। इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया लेने के लिए जब अराबुल इस्लाम से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कॉल काट दिया और उनका कोई बयान सामने नहीं आया। दूसरी तरफ आईएसएफ के प्रमुख और विधायक नौशाद सिद्दीकी ने इस मुद्दे पर अनभिज्ञता जताई है। उन्होंने कहा कि वह इस समय विधानसभा की स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में व्यस्त हैं और उन्हें अराबुल इस्लाम के इस्तीफे या सोशल मीडिया पोस्ट की जानकारी नहीं है। नौशाद ने स्पष्ट किया कि वह पूरी जानकारी जुटाने के बाद ही इस विषय पर आधिकारिक बयान देंगे।

By UJAGAR

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