पश्चिम बंगाल की नवगठित सरकार ने राज्य में एक बड़ा प्रशासनिक और नीतिगत सुधार करते हुए धर्म के आधार पर चलाई जा रही सभी सरकारी योजनाओं और भत्तों को बंद करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक के बाद राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस बड़े फैसले की आधिकारिक घोषणा की। उन्होंने साफ किया कि धार्मिक आधार पर दी जाने वाली तमाम वित्तीय सहायता और भत्ते केवल इसी महीने (मई) तक मिलेंगे और अगले महीने से इन्हें पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा। कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “धार्मिक वर्गीकरण के आधार पर सूचना एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग और अल्पसंख्यक मामले व मदरसा शिक्षा विभाग द्वारा दी जाने वाली सभी सहायक योजनाएं अब बंद की जा रही हैं। इस महीने यह व्यवस्था लागू रहेगी, लेकिन अगले महीने से इसे पूर्ण रूप से बंद कर दिया जाएगा। इस संबंध में जल्द ही विस्तृत अधिसूचना (नोटिफिकेशन) जारी की जाएगी।” बीजेपी ने विधानसभा चुनाव के दौरान अपने संकल्प पत्र में ‘भत्ता नहीं, भात (रोजगार)’ और सुशासन का वादा किया था। सरकार गठन के महज 9 दिनों के भीतर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निर्देश पर यह बड़ा फैसला लिया गया है। पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार के कार्यकाल में विपक्ष में रहते हुए बीजेपी लगातार आरोप लगाती रही थी कि भत्तों के नाम पर तुष्टिकरण की राजनीति की जा रही है और इस ‘रेवड़ी संस्कृति’ के कारण राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ पूरी तरह टूट चुकी है। अब सत्ता में आते ही सरकार ने धर्म के आधार पर बने इन ‘भेदभावपूर्ण’ नियमों को खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। गौरतलब है कि पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार ने सामाजिक विकास योजना के तहत राज्य के पुरोहितों, इमामों और मोअज्जिनों के लिए 1500 रुपये का मासिक भत्ता शुरू किया था। इसी साल मार्च के महीने में ममता सरकार ने इसमें 500 रुपये की बढ़ोतरी कर इसे 2000 रुपये प्रति माह कर दिया था। इस योजना को लेकर राज्य में काफी राजनीतिक विवाद भी हुआ था। अब नई सरकार के इस फैसले के बाद राज्य में चल रहे इमाम-मोअज्जिन और पुरोहित भत्ते पर पूरी तरह से रोक लग जाएगी।

By UJAGAR

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *