प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS की बढ़ती वैश्विक भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि यह समूह अब दुनिया की अर्थव्यवस्था और व्यापार में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। उन्होंने बताया कि BRICS देश मिलकर विश्व की करीब 50 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। यही वजह है कि वैश्विक स्तर पर लिए जाने वाले आर्थिक और व्यापारिक फैसलों में इस समूह की भूमिका लगातार बढ़ रही है। PM मोदी ने कहा कि BRICS की ताकत केवल इसकी आबादी तक सीमित नहीं है। समूह के सदस्य देश मिलकर दुनिया की करीब 40 प्रतिशत GDP का प्रतिनिधित्व करते हैं। प्रधानमंत्री के मुताबिक, BRICS की स्थापना के बाद से इसकी संयुक्त अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है और इसकी आर्थिक क्षमता वैश्विक अर्थव्यवस्था की तुलना में कहीं तेज गति से बढ़ी है। प्रधानमंत्री ने समूह के देशों के बीच व्यापार को और आसान बनाने की जरूरत बताई। उन्होंने BRICS बिजनेस काउंसिल से अपील की कि व्यापार के रास्ते में आने वाली प्रमुख बाधाओं की पहचान कर उन्हें दूर करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। उन्होंने खास तौर पर शीर्ष 10 व्यापारिक बाधाओं को चिन्हित कर उन पर काम करने का सुझाव दिया। मोदी ने BRICS देशों के कारोबारियों और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग को नई गति देने की बात कही। उन्होंने हर साल BRICS देशों के 100 स्टार्टअप्स को दूसरे सदस्य देशों के बाजारों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखने का सुझाव दिया। इसके साथ ही उन्होंने हर वर्ष करीब 1000 नई कारोबारी साझेदारियां विकसित करने की दिशा में काम करने की बात कही। प्रधानमंत्री ने भारत की आर्थिक सोच को दुनिया के सामने रखते हुए ‘मेक इन इंडिया’ के साथ नवाचार और वैश्विक स्तर पर विस्तार पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य देश में निर्माण और नवाचार को बढ़ावा देने के साथ भारतीय क्षमताओं को वैश्विक बाजार तक पहुंचाना है। इस दिशा में BRICS देशों के बीच निवेश, तकनीक, MSME और स्टार्टअप सहयोग को अहम माना गया। PM मोदी ने वैश्विक व्यापार के लिए समुद्री मार्गों की सुरक्षा को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सप्लाई चेन की निरंतरता के लिए समुद्री रास्तों का सुरक्षित और खुला रहना जरूरी है। इसके साथ ही नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी उन्होंने जोर दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि BRICS अब केवल कुछ देशों का आर्थिक मंच नहीं रह गया है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में इसका प्रभाव लगातार मजबूत हो रहा है। करीब आधी दुनिया की आबादी और 40 प्रतिशत वैश्विक GDP का प्रतिनिधित्व करने वाले इस समूह से आने वाले समय में आर्थिक सहयोग, व्यापार और निवेश के क्षेत्र में और बड़ी भूमिका निभाने की उम्मीद है।
