प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर राज्य भर में आयोजित पहले ‘अन्नपूर्णा दिवस’ के मंच से मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने राज्य में कड़े सामाजिक सुधारों और जनकल्याणकारी योजनाओं का खाका प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनकी सरकार केवल भत्ते बांटने के लिए नहीं, बल्कि राज्य में बुनियादी सुधार लाने के लिए आई है। उन्होंने बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने और नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार के खिलाफ प्रशासन की ‘जीरो टॉलरेंस’ (शून्य सहनशीलता) नीति को दोहराया। राज्य में कम उम्र में विवाह और किशोर गर्भावस्था (टीनएज डिलीवरी) के मामलों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि बीते छह महीनों में राज्य में लगभग 60 हजार बाल विवाह और कम उम्र में डिलीवरी के मामले सामने आए हैं। इनमें अकेले मुर्शिदाबाद जिले में 13 हजार और दक्षिण 24 परगना में 7 हजार मामले दर्ज किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि यदि 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की का विवाह कराया जाता है, तो न केवल अभिभावकों के खिलाफ कार्रवाई होगी, बल्कि विवाह कराने वाले काजी या पुजारी को भी जेल जाना पड़ेगा। इसके साथ ही उन्होंने बंगाल को ‘नशामुक्त’ बनाने के लिए सभी अवैध ड्रग ठिकानों को ध्वस्त करने का आह्वान किया। सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में घोषणाएं करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘प्रधानमंत्री की गारंटी’ के तहत शुरू की गई ‘अन्नपूर्णा योजना’ के माध्यम से राज्य की 1 करोड़ 60 लाख से अधिक महिलाओं के बैंक खातों में सीधे वित्तीय सहायता की राशि पहुंचनी शुरू हो चुकी है।महिलाओं के कल्याण के लिए उठाए गए कदमों का ब्योरा देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि बीते अगस्त महीने से आईसीडीएस (ICDS) और आशा (ASHA) कार्यकर्ताओं के वेतन में 5,000 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। इसके अलावा प्राणिमित्रों के वेतन में 2,000 रुपये की वृद्धि के साथ उन्हें भी ‘अन्नपूर्णा योजना’ के दायरे में लाया गया है। 60 वर्ष से अधिक आयु की विधवा महिलाओं की मासिक पेंशन को 1,000 रुपये से बढ़ाकर 1,500 रुपये कर दिया गया है। शिक्षा और स्वास्थ्य के मोर्चे पर जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि आईसीडीएस केंद्रों में गर्भवती माताओं के लिए खाद्य आवंटन 12 रुपये से बढ़ाकर 14 रुपये कर दिया गया है। वहीं, बीते 14 अगस्त को ‘कन्याराष्ट्र दिवस’ के अवसर पर 20 लाख 13 हजार छात्राओं के खातों में 1,000-1,000 रुपये भेजे गए, जिसे वर्ष 2027 में दोगुना (2,000 रुपये) कर दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, उच्च माध्यमिक (12वीं) के बाद स्नातक की पढ़ाई करने वाली छात्राओं को तीन वर्षों में कुल 50,000 रुपये (17 हजार, 17 हजार और 16 हजार रुपये) की वित्तीय सहायता दी जाएगी।मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ के तहत बनने वाले 50 लाख नए मकानों का मालिकाना हक परिवार की महिलाओं के नाम ही पंजीकृत किया जाएगा। इसके साथ ही नारी सुरक्षा पर सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया कि सेवानिवृत्त न्यायाधीश समाप्ति चटर्जी और आईपीएस अधिकारी दमयंती सेन के नेतृत्व में एक विशेष आयोग का गठन किया गया है, जो महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों पर कठोरता से कार्रवाई करेगा।
