केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय कर अनुसंधान एवं सलाहकार संस्थान (ITRAF) से अंतरराष्ट्रीय कराधान के मुद्दों पर अपनी विशेषज्ञता को नीति निर्माण और सार्वजनिक चर्चा में अधिक प्रभावी ढंग से सामने रखने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि संगठन की उच्च गुणवत्ता वाली टिप्पणियां सिर्फ टैक्स विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं तक सीमित न रहें, बल्कि आम लोगों तक भी पहुंचनी चाहिए। कर्नाटक के बेंगलुरु में आयोजित ITRAF के 8वें अंतरराष्ट्रीय कर सम्मेलन को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने संगठन के कामकाज की सराहना की। उन्होंने कहा कि ITRAF ने पिछले एक दशक में अंतरराष्ट्रीय कराधान के क्षेत्र में लगातार और शांत तरीके से योगदान दिया है। सीतारमण ने संगठन से अपने काम को ज्यादा स्पष्ट और व्यापक रूप से सामने रखने की अपील करते हुए कहा कि उसकी विशेषज्ञ टिप्पणियों को नीति निर्माण की प्रक्रियाओं में भी अधिक प्रमुखता मिलनी चाहिए। वित्त मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कराधान से जुड़े विषय अब केवल विशेषज्ञों या पेशेवरों तक सीमित नहीं हैं। वैश्विक कारोबार और बदलते टैक्स नियमों के दौर में इन विषयों पर होने वाली चर्चा का असर व्यापक स्तर पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि ITRAF की टिप्पणियां पहले से ही टैक्स क्षेत्र के पेशेवरों तक पहुंच रही हैं, लेकिन संगठन को अपने शोध और विशेषज्ञ राय को आम जनता के बीच भी अधिक प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करना चाहिए। सीतारमण ने ITRAF की विशेषज्ञता का उल्लेख करते हुए कहा कि संगठन से भारत की बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों के पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी और टैक्स प्रमुख, वरिष्ठ अधिवक्ता, प्रमुख पेशेवर फर्मों के पार्टनर और अनुभवी कर विशेषज्ञ जुड़े हुए हैं। उन्होंने इन विशेषज्ञों को अंतरराष्ट्रीय कराधान के क्षेत्र के दिग्गज बताते हुए कहा कि इन लोगों के अनुभव और विशेषज्ञता का सार्वजनिक नीति में भी बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है। वित्त मंत्री ने ITRAF के अब तक के प्रकाशनों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि संस्था अंतरराष्ट्रीय कराधान से जुड़े विषयों पर सात खंड प्रकाशित कर चुकी है। इन पुस्तकों की प्रस्तावनाएँ इस क्षेत्र के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने लिखी हैं। उन्होंने कहा कि यह कार्य संगठन की शोध क्षमता और अंतरराष्ट्रीय कराधान के क्षेत्र में उसकी विशेषज्ञता को दर्शाते हैं। निर्मला सीतारमण ने ITRAF की अंतरराष्ट्रीय भागीदारी का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि संगठन के सम्मेलन द हेग स्थित संस्थानों, लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और लंदन स्थित चार्टर्ड इंस्टीट्यूट ऑफ टैक्सेशन जैसे संस्थानों के सहयोग से आयोजित किए गए हैं। वित्त मंत्री के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ इस तरह की भागीदारी से भारत में अंतरराष्ट्रीय कराधान पर होने वाली विशेषज्ञ चर्चा को वैश्विक स्तर से जोड़ने में मदद मिलती है।

By UJAGAR

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