रविवार को राज्य में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाएगा। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री स्वयं कोलकाता में मौजूद रहेंगे। इस आयोजन में शामिल होने के लिए सरकार की ओर से आवेदन किया गया था, जिसे लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट में एक मामला दायर किया गया। गुरुवार को याचिकाकर्ताओं के वकील की ओर से कहा गया था कि किसी भी कार्यक्रम में जाने के लिए सरकार किसी को बाध्य नहीं कर सकती। यदि किसी कर्मचारी की तबीयत खराब हो तो वह कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सकता। ऐसे में यदि सरकार उस कर्मचारी के खिलाफ कोई कार्रवाई करती है, तो वह उचित नहीं होगा। हालांकि सरकारी वकील ने मौखिक रूप से कहा कि ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त कार्यक्रम है और इस वर्ष यह कोलकाता में आयोजित हो रहा है, इसलिए इस आयोजन का वैश्विक स्तर पर विशेष महत्व है। शुक्रवार को मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील विकासरंजन भट्टाचार्य ने कहा, “सरकार इस तरह हम पर कोई चीज़ थोप नहीं सकती। हम इसमें शामिल नहीं होना चाहते, इसे मानने का सवाल ही नहीं है। इसे वैकल्पिक क्यों नहीं रखा गया?” वहीं सरकारी वकील, अतिरिक्त महाधिवक्ता बिल्वदल भट्टाचार्य ने कहा, “ऐसी याचिकाओं का कोई अर्थ नहीं है। इससे अदालत का अनावश्यक बोझ बढ़ाया गया है। कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि इसमें शामिल होना अनिवार्य है। यदि कोई उपस्थित नहीं होता है तो उसके खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं होगी। सरकारी नोटिस में भी कहीं यह नहीं कहा गया है कि उपस्थिति अनिवार्य है।” मामले की सुनवाई के बाद दोनों पक्षों की दलीलें सुनते हुए न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के कार्यक्रम में सरकारी कर्मचारियों की उपस्थिति अनिवार्य नहीं है। उन्होंने मामले को खारिज करते हुए टिप्पणी की कि इस याचिका की कोई आवश्यकता नहीं थी। न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा ने कहा, “कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि किसी विशेष स्थान पर जाना अनिवार्य है। कोई चाहे तो अपनी सुविधानुसार स्थान से भी इस कार्यक्रम से जुड़ सकता है। इस मामले की कोई जरूरत ही नहीं थी।”

By UJAGAR

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