दक्षिण 24 परगना के काकद्वीप में लगातार बारिश के बाद एक बड़ा हादसा सामने आया है। नामखाना ब्लॉक के बुधाखाली ग्राम पंचायत क्षेत्र में विवेकानंद पुल का एक हिस्सा मिट्टी धंसने के कारण टूट गया। पुल के क्षतिग्रस्त होने से आसपास के गांवों के लोगों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। पुल टूटने के बाद भी कुछ ग्रामीण अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए इसी रास्ते से आने-जाने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों ने पुल के बचे हुए हिस्से पर कई बांस रखकर अस्थायी रास्ता बनाया है। इसी के सहारे लोग अपनी जान जोखिम में डालकर पुल पार कर रहे हैं। पुल के टूटने का सबसे ज्यादा असर महिलाओं और स्कूली छात्रों पर पड़ा है। स्कूल, बाजार और दूसरे जरूरी कामों के लिए इस रास्ते का इस्तेमाल करने वाले लोगों को अब काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, राजनगर और फटिकपुर गांव के बीच चंकुरी नदी बहती है। करीब 30 साल पहले ग्राम पंचायत की ओर से नदी पर लकड़ी का पुल बनाया गया था। समय-समय पर इसकी मरम्मत जरूर की गई, लेकिन अब तक इसे स्थायी रूप से पक्के पुल में नहीं बदला गया। ग्रामीणों का आरोप है कि हर चुनाव के दौरान लकड़ी के पुल की जगह कंक्रीट का स्थायी पुल बनाने का आश्वासन दिया जाता रहा है। हालांकि, चुनाव खत्म होने के बाद इस दिशा में कोई स्थायी समाधान नहीं निकला। अब पुल के टूटने के बाद ग्रामीणों में नाराजगी है। फटिकपुर गांव के करीब 4 हजार लोग रोजमर्रा की आवाजाही के लिए इस पुल पर निर्भर हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, ग्राम पंचायत कार्यालय, हाई स्कूल, अस्पताल और स्थानीय बाजार तक पहुंचने के लिए यह मुख्य रास्ता है। करीब 2 हजार लोग प्रतिदिन इस पुल का इस्तेमाल करते हैं। पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद अधिकांश ग्रामीण और छात्र वैकल्पिक रास्ते का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके चलते उन्हें बाजार और स्कूल तक पहुंचने के लिए करीब तीन किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, अंधेरा होने के बाद स्थिति और ज्यादा मुश्किल हो जाती है। क्षतिग्रस्त पुल और बांस के सहारे बनाए गए अस्थायी रास्ते से रात में गुजरना बेहद जोखिम भरा है। ग्रामीणों को दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पुल की तत्काल मरम्मत कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि अस्थायी मरम्मत के साथ-साथ यहां जल्द से जल्द स्थायी कंक्रीट पुल का निर्माण कराया जाए, ताकि लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान हो सके। इस मामले में सुंदरबन विकास विभाग के मंत्री दीपांकर जाना और स्थानीय निवासी निशिकांत जाना, मोंटू पात्रा और लक्ष्मण चंद्र सामंत की बाइट ली गई है।

By UJAGAR

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