पश्चिम बंगाल विधानसभा के विधायकों के दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के पहले ही दिन राजनीतिक गर्मी बढ़ गयी. विधायक और तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कुणाल घोष शुक्रवार को कार्यक्रम में पहुंचे जरूर, लेकिन उद्घाटन सत्र के तुरंत बाद वॉकआउट कर बाहर निकल गये. बाहर आकर उन्होंने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला और राज्य विधानसभा स्पीकर रथींद्र बोस पर तृणमूल को तोड़ने के खेल में शामिल होने का गंभीर आरोप लगाया. शुक्रवार से न्यू टाउन स्थित विश्व बंगला कन्वेंशन सेंटर में विधायकों के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ. इसमें लोकसभा स्पीकर ओम बिरला, विधानसभा स्पीकर रथींद्र बोस, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह, राज्यपाल आरएन रवि, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और विपक्ष के नेता रितब्रत बनर्जी मौजूद थे. कार्यक्रम का उद्देश्य नये विधायकों को संसदीय प्रक्रियाओं, नियमों और सदन की कार्यप्रणाली की जानकारी देना है. दीप प्रज्ज्वलन, वंदे मातरम् और राष्ट्रगान के बाद कार्यक्रम आगे बढ़ा. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और ऋतब्रत बनर्जी ने भाषण भी दिया. शुभेंदु ने अपने संबोधन में आरोप लगाया कि तृणमूल शासन के दौरान विपक्षी नेताओं को प्रशासनिक बैठकों में बुलाया तक नहीं जाता था. इसी बीच, उद्घाटन सत्र में मौजूद कुणाल घोष अचानक कार्यक्रम छोड़कर बाहर निकल गये. उन्होंने कहा, “विधायक के तौर पर इस प्रशिक्षण शिविर में आना मेरा कर्तव्य था. मैं आया, लेकिन वॉकआउट करके बाहर निकलना मेरा फैसला है.” घोष ने स्पष्ट किया कि वे लोकसभा स्पीकर, विधानसभा स्पीकर, मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री के पद का सम्मान करते हैं, लेकिन कुछ व्यक्तियों के बयान सुनना या न सुनना उनका व्यक्तिगत निर्णय है. उन्होंने कहा, “मैंने तय किया कि मैं कुछ लोगों की बातें नहीं सुनूंगा, इसलिए मैं विश्व बंगला कन्वेंशन सेंटर छोड़कर निकल आया.” अपने आरोपों को और तीखा करते हुए कुणाल ने कहा, “लोकसभा स्पीकर सम्मानित पद पर हैं, लेकिन जो सांसद पार्टी तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें अयोग्य ठहराने के बजाय उन्हें संरक्षण दिया जा रहा है. कुणाल ने कहा कि राज्य के स्पीकर का भी मैं सम्मान करता हूं, लेकिन मुझे नहीं लगता कि वे निष्पक्ष तरीके से काम कर रहे हैं.” उन्होंने दावा किया कि विधानसभा में भी उनके साथ अन्याय हुआ और उन्हें बोलने का अवसर नहीं दिया गया. घोष ने कहा, “मैं इनके मुंह से संसदीय नैतिकता का उपदेश नहीं सुनूंगा. तृणमूल के भीतर जारी सत्ता संघर्ष पर इशारा करते हुए कुणाल ने अप्रत्यक्ष रूप से तृणमूल के रितब्रत खेमे को ‘विश्वासघाती’ बताया. माना जा रहा है कि उनका इशारा उन विधायकों और सांसदों की ओर था जिन्होंने नये राजनीतिक गुट एनसीपीआई के साथ जाने का फैसला किया है. कुणाल घोष ने यह भी कहा कि यदि उन्हें संसदीय राजनीति की बारीकियां सीखनी हों, तो वे पूर्व विधानसभा स्पीकर बिमान बंद्योपाध्याय से सीखेंगे. उन्होंने कहा- 1990 से मैं रिपोर्टर के रूप में विधानसभा कवर कर रहा हूं. बाद में संसद भी कवर की, राज्यसभा सदस्य भी रहा. इसलिए मुझे संसदीय व्यवस्था की अच्छी समझ है. बाकी जो सीखना होगा, बिमान बंद्योपाध्याय से सीख लूंगा. राजनीति के जानकारों का मानना है कि घोष का यह वॉकआउट साफ संकेत है कि तृणमूल के अंदरूनी संघर्ष की आंच अब विधानसभा और संसदीय मंचों तक पहुंच चुकी है.

By UJAGAR

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