पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के मध्यमग्राम नगरपालिका क्षेत्र के दोहारिया में तालाब पाटकर बहुमंजिला इमारत बनाने के आरोप को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। रविवार को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं ने निर्माणाधीन हाउसिंग परियोजना के खिलाफ प्रदर्शन किया और काम रुकवा दिया। वहीं, जमीन मालिक संतोष हलदार ने बीजेपी कार्यकर्ताओं पर रंगदारी मांगने और रकम नहीं मिलने पर निर्माण कार्य में बाधा डालने का आरोप लगाया है। इस विवाद ने इलाके में जलाशयों के संरक्षण, निर्माण कार्यों की वैधता और स्थानीय राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, तालाब भरने और रंगदारी मांगने से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की आधिकारिक प्रतिक्रिया भी सामने आना बाकी है। मध्यमग्राम मंडल-2 बीजेपी के महासचिव शुभजीत कुंडू के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने दोहारिया स्थित निर्माण स्थल पर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया। बीजेपी नेताओं का आरोप है कि इलाके में प्राकृतिक जलाशयों को कचरे और निर्माण सामग्री से भरकर धीरे-धीरे खत्म किया जा रहा है। इसके बाद इन जमीनों पर आवासीय परियोजनाएं विकसित करने की कोशिश की जाती है। बीजेपी ने संतोष हलदार पर तालाब को भरकर वहां बहुमंजिला आवासीय इमारत का निर्माण शुरू कराने का आरोप लगाया है। पार्टी नेताओं का दावा है कि आसपास के अन्य जलाशयों पर भी इसी तरह का खतरा बना हुआ है। बीजेपी ने मामले में अनुमंडल पदाधिकारी (SDO), प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) और संबंधित पर्यावरण अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराने की चेतावनी दी है। पार्टी का कहना है कि यदि कथित अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन तेज किया जाएगा। बीजेपी के आरोपों को खारिज करते हुए जमीन मालिक संतोष हलदार ने पार्टी कार्यकर्ताओं पर ही जबरन वसूली की कोशिश करने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि संबंधित जमीन उनकी वैध संपत्ति है और वहां निर्माण कार्य नियमों के अनुसार कराया जा रहा था। हलदार के मुताबिक, स्थानीय बीजेपी कार्यकर्ताओं ने उनसे मोटी रकम की मांग की थी। उनके आरोप के अनुसार, रकम देने से इनकार करने के बाद निर्माण कार्य रुकवाया गया और तालाब पाटने का मामला उठाया गया। हालांकि, रंगदारी मांगने के इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। जमीन के स्वामित्व, निर्माण की अनुमति और जलाशय की वास्तविक स्थिति से जुड़े दस्तावेज सामने आने के बाद ही विवाद के विभिन्न पहलुओं की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी। मध्यमग्राम, बारासात और न्यू बैरकपुर समेत उत्तर 24 परगना के कई उपनगरीय इलाकों में तेजी से शहरीकरण के बीच जलाशयों और निचली जमीनों के संरक्षण को लेकर चिंताएं उठती रही हैं। स्थानीय स्तर पर तालाब भरने और निर्माण गतिविधियों के कारण जल निकासी प्रभावित होने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। दोहारिया की घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि क्या निर्माणाधीन परियोजना के लिए जरूरी अनुमतियां ली गई हैं और संबंधित जमीन का इस्तेमाल नियमानुसार किया जा रहा है या नहीं। स्थानीय लोगों की ओर से जलाशयों के संरक्षण और बरसात के दौरान जलजमाव की समस्या को लेकर चिंता जताई जा रही है। हालांकि, इस विशेष परियोजना और इलाके में जलभराव के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की पुष्टि के लिए संबंधित विभागों की जांच और तकनीकी आकलन जरूरी होगा। फिलहाल, दोहारिया में निर्माण कार्य को लेकर दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बीजेपी ने कथित जलाशय भराव के खिलाफ प्रशासनिक शिकायत करने की बात कही है, जबकि जमीन मालिक ने पार्टी कार्यकर्ताओं पर रंगदारी मांगने का आरोप लगाया है। अब मामले में प्रशासन की भूमिका अहम होगी। जमीन के दस्तावेजों, निर्माण की अनुमति और जलाशय की स्थिति की जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि निर्माण नियमों के अनुरूप हो रहा था या नहीं। इसी तरह, रंगदारी के आरोपों की पुष्टि भी जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगी।

By UJAGAR

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