ईरान युद्ध का अंजाम क्‍या होगा यह तो आने वाला वक्‍त बताएगा, लेकिन इसका असर दिखना शुरू हो चुका है. अमेरिका और इजरायल ने पश्चिम एशिया के उस हिस्‍से पर हमला किया है, जो दुनिया को रफ्तार देता है. इस जोन से दुनिया को एनर्जी मुहैया कराई जाती है. पेट्रोल-डीजल के साथ ही गैस की आपूर्ति यहीं से होती है. ईरान के एनर्जी प्‍लांट पर अटैक किया गया. इसके जवाब में तेहरान ने भी कतर और साऊदी जैसे देशों को निशाना बनाया. इसके बाद अब पेट्रोलियम प्रोडक्‍ट्स और गैस की आपूर्ति के और ज्‍यादा गंभीर तरीके से बाधित होने की आशंका गहरा गई है. दूसरी तरफ, होर्मुज स्‍ट्रेट में मचे बवाल ने पूरे मामले को और सीरियस बना दिया है. एनर्जी कॉरिडोर होर्मुज से जहाजों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है. इस पूरे घटनाक्रम से भारत भी अछूता नहीं है. अब ईरान जंग की धधक हिन्‍द महासागर तक पहुंच गई है. ईरान ने इंडियन ओशन में स्थित अमेरिका-ब्रिटेन के ज्‍वाइंट मिलिट्री बेस डिएगो गार्सिया पर मिसाइल अटैक किया है. हालांकि, इससे किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन ईरान के इस कदम से युद्ध की आग और भड़कने की आशंका है और यदि हिन्‍द महासागर क्षेत्र भी इसकी चपेट में आता है तो इससे निपटना भारत के लिए एक और चुनौती होगी. दरअसल, ईरान ने जिस डिएगो गार्सिया की तरफ मिसाइलें दागी हैं, वह भारत से तकीबन 1800 किलोमीटर की दूरी पर ही स्थित है. भारत के लिए हिन्‍द महासागर बड़ा ट्रांजिट कॉरिडोर भी है, ऐसे में यदि इस क्षेत्र में किसी तरह का बावेला खड़ा होता है या टकराव की नौबत आती है तो नई दिल्‍ली के लिए यह कतई शुभ समाचार नहीं होगा. होर्मुज स्‍ट्रेट में पहले से ही उथल-पुथल मचा हुआ है, ऐसे में अब यदि हिन्‍द महासागर में भी अशांति फैलती है तो तेल और गैस के साथ ही अन्‍य प्रोडक्‍ट्स के सप्‍लाई चेन के भी बाधित होने की आशंका बढ़ जाएगी. हिन्‍द महासागर भारत के लिए वॉटर गेटवे है, ऐसे में भारत यह बिल्‍कुल नहीं चाहेगा कि उसकी दहलीज पर किसी तरह का टकराव हो.

हिन्‍द महासागर भारत के लिए लाइफलाइन की तरह है, जहां से देश का 90 प्रतिशत से अधिक व्यापार (वॉल्यूम के आधार पर) और लगभग 70 प्रतिशत व्यापार (मूल्य के आधार पर) संचालित होता है. यही नहीं भारत के करीब 80 प्रतिशत तेल आयात भी इसी मार्ग से होते हैं, जिससे यह क्षेत्र देश की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बन जाता है. रणनीतिक दृष्टि से हिन्‍द महासागर वैश्विक व्यापार के प्रमुख समुद्री मार्गों (SLOCs) का केंद्र है, जो मध्य-पूर्व, पूर्वी एशिया और यूरोप को जोड़ते हैं. चीन की String of Pearls रणनीति के जवाब में भारत क्षेत्रीय साझेदारियों को मजबूत करने और अपनी नौसैनिक उपस्थिति बढ़ाने पर जोर दे रहा है. साथ ही, Information Fusion Centre – Indian Ocean Region के माध्यम से समुद्री सुरक्षा और निगरानी को भी सुदृढ़ किया जा रहा है. इसके अलावा ब्लू इकोनॉमी के तहत मत्स्य पालन, ऑयल एक्‍सप्‍लोरेशन और गहरे समुद्री खनन जैसी गतिविधियां भारत की दीर्घकालिक आर्थिक संभावनाओं को भी मजबूती प्रदान कर रही हैं.

By UJAGAR

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