वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की ऊंची कीमतों और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी के बीच सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने सोमवार को एक बार फिर पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोतरी कर दी है। पिछले 10 दिनों में यह चौथी बार है जब पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े हैं। लंबे अंतराल के बाद हाल में 15 मई को पहली बार तेल की कीमतों में वृद्धि हुई थी। तब से लेकर अब तक पेट्रोल 7.35 रुपये और डीजल 7.82 रुपये प्रति लीटर महंगे हो चुके हैं। इनकी कीमतों में अभी और वृद्धि हो सकती है। तेल अधिकारियों का कहना है कि इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतें और रुपये के अवमूल्यन के कारण बढ़ी हुई आयात लागत है। ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) के अधिकारियों ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में लगातार अस्थिरता और अंडर-रिकवरी (लागत से कम पर बिक्री) ने तेल खुदरा विक्रेताओं पर भारी दबाव बना दिया है। सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, पिछली बढ़ोतरी के बावजूद तेल कंपनियां अब भी भारी नुकसान (अंडर-रिकवरी) का सामना कर रही हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने पहले बताया था कि 15 मई की बढ़ोतरी से नुकसान में करीब 25 प्रतिशत की कमी आई थी, लेकिन इसके बावजूद सरकारी तेल कंपनियों को प्रतिदिन लगभग 750 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा था। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (CRISIL) के अनुमानों के अनुसार, हालिया संशोधनों के बाद भी तेल कंपनियों को पेट्रोल पर लगभग 10 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर लगभग 13 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। ऐसा नहीं है कि पेट्रोल-डीजल में यह तेजी थम जाएगी। जानकारों के मुताबिक आने वाले दिनों में ईंधन की कीमत और बढ़ सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि तेल कंपनियां अपना घाटा कम करना चाहती हैं। दरअसल, पिछले काफी समय से कच्चे तेल की कीमत प्रति बैरल 100 डॉलर से ऊपर बनी हुई है। वहीं डॉलर के मुकाबले रुपये में रिकॉर्ड गिरावट आई है। इसके चलते तेल कंपनियों को बड़ा घाटा हो रहा है। कंपनियां पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ाकर अपना घाटा कम करने पर लगी हैं।
