संघ लोक सेवा आयोग हर साल देश के बड़े एग्जाम आयोजित कराता है। इस आयोग ने 1 अक्टूबर 2026 को अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे कर लिए हैं। 1926 से लेकर 2026 तक भर्ती आयोग लाखों उम्मीदवारों की भर्ती कर चुका है। देश को बड़े-बड़े अधिकारी इस आयोग ने दिए हैं। ऐसे में यूपीएससी के शताब्दी समारोह के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने भारत मंडपम में आयोग के योगदान पर खुलकर बात की। उन्होंने भर्ती प्रक्रिया से लेकर उसमें सुधार और भविष्य की चुनौतियों पर भी अपना दृष्टिकोण रखा। पीएम मोदी ने कहा कि ‘बीते दशकों में यूपीएससी ने अपने दायित्वों को बेहतरीन तरीके से निभाया है। इतिहास से आगे बढ़कर अब हमारे सामने भारत का भविष्य इंतजार कर रहा है।’ पीएम आगे कहते हैं कि ’21वीं सदी का एक क्वार्टर बीत चुका है। आने वाले 20-25 साल भारत की हर संस्था के लिए बहुत अहम हैं। विकसित भारत के लिए जिस तरह की गवर्नेंस भारत को चाहिए उसका बहुत बड़ा माध्यम यूपीएससी और राज्य के चयन आयोग भी हैं। आज आप जिन युवाओं की भर्ती कर रहे हैं, वे विकसित भारत के निर्माण में बहुत बड़ी भूमिका निभाएंगे। इसी को ध्यान में रखते हुए 2 कसौटियों को हमेशा ध्यान रखना है। पहली कसौटी है ‘नेशन फर्स्ट’ और दूसरी कसौटी है ‘सिटीजन फर्स्ट’। यही दो कसौटियाँ हैं जिन पर सेलेक्शन को कसा जाना है। इस भाव से भरे कैंडिडेट का जब सेलेक्शन होगा और उसे जब परखा जाएगा तो राष्ट्रीय लक्ष्यों की प्राप्ति उतनी ही सहज और आसान हो जाएगी।’ UPSC पर पीएम मोदी की 10 बड़ी बातें:-
- आज नागरिक किसी सर्विस के लिए हफ्तों या महीनों का इंतजार नहीं करना चाहता। जब AI हजारों डॉक्यूमेंट को कुछ ही क्षणों में प्रोसेस कर सकता है। जब सरकार के पास रियल टाइम डेटा उपलब्ध है, तो नागरिक जल्दी से समाधान चाहता है। यही बदलती हुई सोच हमारी सिविल सर्विस से भी नए बदलाव की मांग करती है। इसीलिए हमें अपने सेलेक्शन पैरामीटर्स और रिक्रूटमेंट प्रोसेस को भी भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाना होगा।
- हमें ऐसे युवाओं को पब्लिक सर्विस में लाना होगा, जो पब्लिक ऑफिस से नहीं पब्लिक सर्विस से आकर्षित हों। इसीलिए जरूरी है कि रिक्रूटमेंट की परीक्षा केवल यह ना परखें कि कैंडिडेट कितना जानता है बल्कि वह यह भी देखें कि युवा सिविल सर्विस में आना क्यों चाहता है।
- जब भी ट्रेनी ऑफिसर से मिलता हूं तो मैं उनसे कहता हूं वो लिखकर रखें कि वो सिविल सर्विस में क्यों आए हैं? क्योंकि समय के साथ रिस्पॉन्सिबिलिटी बढ़ती है, नई चुनौतियां आती हैं। ऐसे समय में वही छोटा सा नोट उन्हें उनके मूल उद्देश्य की याद दिलाता है। यूपीएससी और राज्यों के आयोग भी कुछ ऐसी व्यवस्था विकसित करने के बारे में विचार कर सकते हैं।
- आज वो दौर है जिसमें हमारा मंत्र है ‘नागरिक देवा भवः’। हमारे लिए नागरिकों की सेवा सर्वोपरि है। इसका मूल सिद्धांत है ‘प्रो-पीपल, प्रोएक्टिव, गुड गवर्नेंस’।
- राष्ट्रीय और राज्य के स्तर पर हमें अपने सेलेक्शन प्रोसेस को इसी स्पीरिट के हिसाब से डिजाइन करना चाहिए। हमें ‘प्रो पीपल, प्रो एक्टिव, गुड गवर्नेंस के पैरामीटर्स के आधार पर देश को वो प्रोफेशनल्स देने हैं, जिनमें गरीब की तकलीफ समझने की संवेदना हो। जो युवा जोश के साथ काम करें। जो देश की आवश्यकता को समझे। कानून का पालन करें।
- आने वाला जो समय है उसमें नई तरह की चुनौतियां समाज के सामने आने वाली हैं। एआई को लेकर इस समय विश्व में जो चर्चा छिड़ी हुई है, उससे हम सब परिचित हैं। ऐसे में हमारे सर्विस सर्वर्स भी अलग-अलग तरह की परिस्थितियों में काम करेंगे। इनफॉर्मेशन वार की स्थिति होगी, एल्गोरिथमिक बायस के चैलेंज होंगे। ऐसे में हमें चयन प्रक्रिया में कॉम्प्लैक्स प्रॉब्लिम सॉल्विंग और दूरदृष्टि को तेज को करने का प्रयासों को भी प्राथमिकता देनी होगी।
- परीक्षाओं को कराने में लगने वाला समय एक बहुत अहम विषय है। परीक्षा को हमें केवल एक इवेंट की तरह नहीं देखना है। इससे अधिक यह युवाओं के भविष्य से जुड़ा हुआ है। परीक्षा में कुछ महीनों की देरी युवाओं के लिए बड़ा संकट बन सकती है। कोचिंग की फीस, रेंट, रहने का खर्च ये बहुत बड़ा बोझ उस परिवार पर होता है। इसीलिए टाइम सर्टिनेटिनी के सिद्धांत को अपनाना बहुत आवश्यक है।
- यूपीएससी को और देशके सभी चयन आयोगों को यह सुनिश्चित करना होगा कि बार को लो किए बिना हमारी एग्जाम साइकिल छोटी कैसे हो।ये केवल एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म नहीं है, ये एक्टिविटी रिफॉर्म भी होगा।
- यूपीएससी हर वर्ष स्टेट पब्लिक सर्विस कमीशंस के साथ मिलकर नेशनल कॉन्फ्रेंस आयोजित करता है, अब उसे और विस्तार करके और अधिक नए विचार से भरने के लिए उसपर जरूर सोचते होंगे। इस कॉन्फ्रेंस में इंटरनेशनल बेस्ड प्रैक्टिसेस को भी स्टडी करना चाहिए। टेक्नोलॉजी का उपयोग करके इस फोकस पर चर्चा होनी चाहिए। क्रॉस लर्निंग के इस प्रयास से यूपीएससी और हर राज्य के चयन आयोग को भी फायदा होगा।
- हमें प्रोसेस और प्रोसिजरल के मानकों पर विचार करने की आवश्यकता है। आप सभी को याद रखना है कि आपका काम युवा शक्ति से जुड़ा हुआ है। यानी, युवा शक्ति से राष्ट्र शक्ति का जो मिशन है, आप उसका एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।
पीएम मोदी ने यह भी कहा कि आज गांवों और कस्बों के युवा भी पब्लिक सर्विस में पहुंच रहे हैं। हमारी बेटियों की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है। 1952 में महिला उम्मीदवारों की संख्या केवल 3 प्रतिशत थी, आज यह 30 प्रतिशत से अधिक हो चु
