पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय हड़कंप मच गया जब टीएमसी सांसद और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी पर सोनारपुर में अज्ञात लोगों द्वारा हमला किया गया। एक पार्टी कार्यकर्ता के घर दौरे के दौरान उन पर अंडे फेंके गए और उनके कपड़े तक फाड़ दिए गए। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि सुरक्षा कर्मियों को उनके सिर पर हेलमेट पहनाकर सुरक्षा घेरे में वहां से बाहर निकालना पड़ा। घटना के बाद अभिषेक बनर्जी ने बीजेपी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इसे ‘बीजेपी प्रायोजित’ हमला करार देते हुए कहा, “यही उनकी लोकतंत्र की शैली है। घटना के समय कहीं भी पुलिस मौजूद नहीं थी। बीजेपी मुझे मार डालना चाहती है।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों को पहले से सूचना देने के बावजूद उन्हें पर्याप्त सुरक्षा नहीं दी गई। अभिषेक ने कहा कि आज हेलमेट की वजह से उनका सिर बच गया, अन्यथा कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती थी। अभिषेक बनर्जी ने साफ कर दिया है कि वह इस घटना को लेकर चुप बैठने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि पूरी घटना कैमरे में कैद हो गई है और वह इस मामले को लेकर हाई कोर्ट का रुख करेंगे तथा राज्यपाल को भी पूरी स्थिति से अवगत कराएंगे। उन्होंने विपक्षी दलों को चुनौती देते हुए कहा कि टीएमसी इस तरह के कायरतापूर्ण हमलों से डरने वाली नहीं है और वह जनता के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगी। 4 मई को चुनाव नतीजों के बाद से ही बंगाल के कई इलाकों में टीएमसी कार्यकर्ताओं पर हमले की खबरें आ रही हैं। अभिषेक बनर्जी इन प्रभावित परिवारों से मिलने के लिए दौरे पर निकले हैं। सोनारपुर में हुई इस घटना ने बंगाल के राजनीतिक माहौल को एक बार फिर गरमा दिया है। मौके पर मौजूद टीएमसी कार्यकर्ताओं ने हमले के विरोध में तुरंत प्रदर्शन शुरू कर दिया। राजनीति में हिंसा का कोई स्थान नहीं है। चाहे किसी भी दल का नेता हो, सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनी रहनी चाहिए। क्या आपको लगता है कि चुनाव के बाद बंगाल में बढ़ती हिंसा पर लगाम लगाने के लिए केंद्रीय हस्तक्षेप जरूरी है? अपने विचार नीचे साझा करें।
