केंद्रीय मंत्री डॉ. एल. मुरुगन का इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वीकार कर लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर राष्ट्रपति ने केंद्रीय मंत्रिपरिषद से मुरुगन का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से मंजूर किया। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 75(2) के तहत प्रक्रिया पूरी की गई। मुरुगन इससे पहले केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इस्तीफे के बाद अब उनका फोकस तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को मजबूत करने और आगामी लोकसभा चुनाव की तैयारियों पर रहने की बात कही गई है। राष्ट्रपति भवन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर डॉ. एल. मुरुगन का केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा स्वीकार किया गया है। यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू होगा।मुरुगन मोदी सरकार में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री के रूप में कार्यरत थे। डॉ. एल. मुरुगन ने अपने इस्तीफे के पत्र में तमिलनाडु में भाजपा को मजबूत करने की इच्छा जाहिर की थी। उन्होंने कहा था कि अब वह अपना अधिक समय राज्य में पार्टी के संगठनात्मक विस्तार और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के साथ काम करने में लगाना चाहते हैं।उनकी प्राथमिकताओं में वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी को तैयार करना भी शामिल है। मुरुगन का मानना है कि राज्य में भाजपा के संगठन को मजबूत करने के लिए जमीनी स्तर पर लगातार काम करना जरूरी है। एल. मुरुगन ने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए बताया था कि वह किसी राजनीतिक परिवार से नहीं आते हैं। उनके माता-पिता दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करते थे और मवेशी भी चराते थे।उन्होंने बताया था कि उनका परिवार आज भी तमिलनाडु के कोनूर गांव में साधारण जीवन जी रहा है। उनके माता-पिता ने कभी कल्पना नहीं की थी कि उनका बेटा केंद्र सरकार में मंत्री बनेगा। मुरुगन ने अपनी राजनीतिक यात्रा का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और भाजपा की उस व्यवस्था को दिया, जिसमें जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने का अवसर मिलता है।

By UJAGAR

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