भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखने का फैसला किया है. केंद्रीय बैंक फिलहाल कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, सप्लाई चेन की बाधाओं और भू-राजनीतिक तनाव के कारण महंगाई और आर्थिक विकास पर पड़ने वाले असर को लेकर ‘रुको और देखो’ की नीति अपना रहा है. अर्थशास्त्रियों को पहले से ही इस फैसले की उम्मीद थी. हालांकि, ज़्यादातर लोगों को उम्मीद है कि साल के अंत तक कम से कम एक बार बढ़ोतरी होगी, क्योंकि तेल की ऊंची कीमतों और कम कैपिटल इनफ़्लो की वजह से रुपये पर दबाव है. 22-29 मई के रॉयटर्स पोल में शामिल लगभग 80% अर्थशास्त्रियों को उम्मीद थी कि MPC 5 जून को रेपो रेट को 5.25% पर ही बनाए रखेगी. 56 लोगों में से 44 ने अनुमान लगाया कि दर में कोई बदलाव नहीं होगा. बाकी अर्थशास्त्रियों में से 11 ने 25-बेसिस-पॉइंट की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया, जबकि एक ने 50-बेसिस-पॉइंट की बढ़ोतरी की उम्मीद जताई. इसके उलट, अप्रैल के पोल में सिर्फ़ एक व्यक्ति ने जून में दर में बढ़ोतरी का अनुमान लगाया था. एक्सपर्ट्स का कहना है कि वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच आरबीआई का यह कदम भारतीय अर्थव्यवस्था और रियल एस्टेट बाजार की मौजूदा विकास रफ्तार को बनाए रखने के लिए बहुत जरूरी था. रियल एस्टेट विशेषज्ञ इस फैसले को बाजार में स्थिरता और सकारात्मक माहौल बनाए रखने वाला एक स्वागत योग्य कदम मान रहे हैं, जो आने वाली तिमाहियों में घरों की बिक्री को और रफ्तार देगा. जिंदल रियल्टी के सीईओ और प्रेसिडेंट अभय मिश्रा ने का कहना है- ‘ यह फैसला मार्केट में पॉजिटिविटी लाएगा. लोन की दरें स्टेबल रहने से होम बायर्स का भरोसा बढ़ेगा, जिससे घरों की सेल में मंदी नहीं आएगी. डेवलपर्स के लिए भी अपनी प्लानिंग को सही तरीके से लागू करना आसान हो जाएगा. लॉन्ग टर्म में देखें तो, इस सेक्टर की फुल पोटेंशियल को अनलॉक करने और हर मार्केट में सस्टेनेबल ग्रोथ के लिए गवर्नमेंट सपोर्ट और मार्केट में कैश लिक्विडिटी का होना बहुत जरूरी है.” व्हाइटलैंड कॉरपोरेशन के डायरेक्टर (स्ट्रैटेजी) सुदीप भट्ट ने का कहना है- ‘रियल एस्टेट के लिए यह फैसला महत्वपूर्ण है. इससे होम लोन दरों में स्थिरता बनी रहती है, जो घर खरीदारों की मांग को बढ़ावा देती है और डेवलपर्स के लिए लिक्विडिटी की स्थिति को बेहतर बनाती है.’
