भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में एक बार फिर रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला लिया है। इसके साथ ही प्रमुख नीतिगत ब्याज दर लगातार चौथी बार 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रहेगी। RBI का यह फैसला बाजार की उम्मीदों के अनुरूप रहा। इससे पहले दिसंबर 2025 में केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती की थी। उसके बाद से अब तक आयोजित चारों मौद्रिक नीति बैठकों में ब्याज दरों को यथावत रखा गया है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने नीति की घोषणा करते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितताएं अभी भी बनी हुई हैं। जुलाई की शुरुआत से पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक सप्लाई चेन को लेकर नई चिंताएं सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि इन अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों के बावजूद भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था मजबूती के संकेत दे रही है। पहली तिमाही के उपलब्ध हाई-फ्रीक्वेंसी आर्थिक आंकड़े देश में मजबूत आर्थिक गतिविधियों की ओर इशारा करते हैं। मौद्रिक नीति समिति ने भविष्य के लिए अपना रुख ‘न्यूट्रल’ बनाए रखा है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में महंगाई, आर्थिक वृद्धि और वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए जरूरत पड़ने पर ब्याज दरों में बदलाव किया जा सकता है, लेकिन फिलहाल कोई जल्दबाजी नहीं की जाएगी। जहां कई देशों के केंद्रीय बैंक महंगाई पर नियंत्रण के लिए ब्याज दरों में वृद्धि कर रहे हैं, वहीं RBI ने भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति को देखते हुए संतुलित रुख अपनाया है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में स्थिर ब्याज दरें आर्थिक गतिविधियों को समर्थन देने में मदद करेंगी। रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होने का सीधा असर होम लोन, ऑटो लोन और अन्य फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज पर पड़ेगा। जिन ग्राहकों की लोन ब्याज दर रेपो रेट से जुड़ी है, उनकी EMI फिलहाल पहले जैसी ही रहेगी। नए कर्ज लेने वालों के लिए भी बैंक की ब्याज दरों में तत्काल कोई बदलाव होने की संभावना नहीं है। RBI ने संकेत दिया है कि घरेलू मांग, निवेश गतिविधियां और आर्थिक संकेतक सकारात्मक बने हुए हैं। हालांकि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा बाजार की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
