सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से यह बताने को कहा कि क्या अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) के फ्रीज बैंक खातों से सीमित राशि अदालत द्वारा नियुक्त प्रशासक को पार्टी के दैनिक खर्चों के लिए जारी की जा सकती है. जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले TMC गुट की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा अंतरिम राहत देने से इनकार किए जाने को चुनौती दी गई है. ईडी ने जांच के दौरान पार्टी के बैंक खातों को फ्रीज कर दिया था. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि प्रशासक को कुछ राशि जारी कर दीजिए, ताकि वह रोजमर्रा के कामकाज का संचालन कर सके. इस पर ईडी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने कहा कि यह राशि पहले से उपलब्ध है. 164 करोड़ रुपये अटैच नहीं किए गए हैं. हालांकि, टीएमसी की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने इस दावे का विरोध करते हुए अदालत से पार्टी को कुछ राहत देने की मांग की. सुनवाई के अंत में सुप्रीम कोर्ट ने ईडी को यह स्पष्ट करने के लिए समय दिया कि क्या अदालत द्वारा पहले नियुक्त सेवानिवृत्त न्यायाधीश, जो प्रशासक के रूप में पार्टी के नियमित खर्चों की निगरानी कर रहे हैं, उन्हें खातों से अतिरिक्त राशि जारी की जा सकती है ? अदालत ने कहा कि हमने दोनों पक्षों को सुझाव दिया है कि क्या कुछ राशि प्रशासक के पक्ष में जारी की जा सकती है ताकि वह रोजमर्रा के कार्यों का संचालन कर सके, विशेषकर तब जब उनकी नियुक्ति अदालत के आदेश से हुई है और उन्हें खर्च का पूरा हिसाब देना है. एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने इस संबंध में निर्देश लेने के लिए समय मांगा है.  मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को होगी. सुप्रीम कोर्ट ने अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITMC) की उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा पार्टी के तीन बैंक खातों को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा फ्रीज किए जाने और मनी लॉन्ड्रिंग जांच पर रोक लगाने से इनकार करने के आदेश को चुनौती दी गई है. जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ के समक्ष वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने TMC की ओर से कहा कि इनके आरोपों पर नजर डालिए. इस पर ASG एस.वी. राजू ने कहा कि यह अंतरिम आदेश है. जवाब में सिब्बल ने कहा कि मुझे पता है कि यह अंतरिम आदेश है. आपको क्या लगता है कि मैं यहां क्यों आया हूं? आरोप 160 करोड़ रुपये का है. इस पर जस्टिस सुंदरेश ने कहा कि यदि हम इस पर फैसला दे दें, तो मुख्य मामले में क्या बचेगा? आप दोनों सहयोग करें और मुख्य मामले का जल्द निस्तारण कराएं. 

By UJAGAR

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